Sonbhadra News: कुछ ही घंटों में नवजात शिशु ने जीता सबका दिल, भावुक रहा मां की ममता का दिखने वाला हर पल.

Story By: विकास कुमार हलचल, ओबरा।
सोनभद्र।
ओबरा थाना क्षेत्र के शिक्षा निकेतन के पास एक नवजात शिशु मिलने से क्षेत्र में कोहतुल का विषय बना हुआ है। जैसे ही नवजात बच्ची मिलने की सूचना क्षेत्र में फैली अज्ञात नवजात शिशु को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नवजात बच्ची को रोता देख पास से टहलने के दौरान गुज़र रही महिला का मन पसीजा और बच्ची को अपने साथ घर ले आई। जिसके बाद डायल 112 को अज्ञात बच्चे के मिलने की सूचना दी गई।
मौके पर पहुंची पुलिस जानकारी लेते हुए छानबीन में जुटी दिखी। 15 से 20 दिन के लगभग बताई जा रही है मिली नवजात शिशु।

नवजात शिशु को पाने वाली महिला ज्योति गोयल ने बताया कि शिक्षा निकेतन कॉलेज की तरफ से टहलने के दौरान उसे कॉलेज के बगल में एक बच्ची की रोने की आवाज आई पास जाकर देखा तो बच्ची बहुत ज्यादा रो रही थी बच्ची को रोता देख उसे गोदी में उठा लिया। जिसके बाद नवजात बच्ची को अपने घर ले आई। देखने में 10 से 15 दिन की बच्ची लग रही है। बच्ची अभी ठीक है रो रही थी तो उसे दुग्ध पिलाया गया और साथ ही कपड़ा बदल गया।

जब बच्ची घर पर आई तो लोगों की भीड़ उम्र पड़ी इस दरमियान पुलिस को भी काफी मशक्कत करने पड़ी भीड़ हटाने के लिए। वही जिले की बाल संरक्षण चाइल्ड टीम को जैसे ही नवजात बच्ची के मिलने की सूचना मिली वैसे ही वह मौके पर पहुंच गए और नवजात बच्ची के बारे में पूरी जांच पड़ताल करने में जुट गईं। बाल संरक्षण इकाई की टीम ने बताया कि नवाजत बच्ची का जिला अस्पताल में मेडिकल होगा। उसके बाद कानूनी प्रक्रिया से जो गोद लेना चाहते हैं उन्हें बच्ची को सौंप दिया जाएगा।

हालांकि बच्ची की वास्तविक मां को और परिवार को ढूंढने का भर्षक प्रयास किया जाएगा। अगर सफलता मिल जाती है तो बच्ची के माता-पिता को बच्ची को सौप दिया जाएगा। उनसे वार्तालाप कर बच्ची को अपने पास रखने की गुजारिश की जाएगी। अगर फिर भी बच्ची को वह अपनाना नहीं चाहते तो बच्ची के वैकल्पिक मां के तौर पर जो आगे आएगा। जो नियम का पालन करेगा, उसी को नवजात बच्ची को पालन पोषण के लिए सौंप दिया जाएगा।

बता दे किनवजात बच्ची को कलेजे से लगाने के लिए मौजूद महिलाओं की ममता इस कदर जागी की कई महिलाओं ने बिटिया को पालने की जिद्द ठान ली, पर कानून प्रक्रिया के आगे मां की ममता बौनी साबित हुई। हर कोई बिटिया रानी को कलेजे से लगाकर बहुत सारा प्यार देना चाहती थी। लेकिन कहा जाता है ना की हर वह चीज संभव नहीं जो आपके मन में हो, नियति और भगवान के आगे मानव हारा हुआ ही महसूस करता है।
इस दौरान सबसे बड़ा भावुक समय उस समय देखने को मिला जब बच्ची को चाइल्ड केयर की टीम ले जाने लगी।

इस दौरान वहां पर जो इकट्ठा हुई महिलाएं थी और जिस महिला ने मां की ममता का मिशाल पेश कर उस बच्ची को कॉलेज के पास से अपने घर लाया था। उनकी आंखों में आंसू आ गए और यह पल देखकर आसपास के सभी लोग भावुक हो गए। बस कुछ घंटे के ही मिलन और फिर विदाई के माहौल ने ऐसा गमगीन वातावरण पैदा कर दिया की छोटे-छोटे बच्चों के आँखों में आंशु तक आ गए। मानों मासूम सी दिखने वाली मात्र 15 दिन की बेटी से उनका जन्मों-जन्मों से नाता हो।

कुछ घंटो लगाव का एक ऐसा मिशाल है जो भारत की पहचान है। विश्व में ऐसा कोई देश नहीं जो मां की ममता की बराबरी भारत देश से करे। यहां हर शुभ कार्य की शुरुआत नारी शक्ति को आगे करके किया जाता है। यहां नवरात्रि में बेटी को हर घर में पूजा जाता है। नारी किसी भी रूप में हो उसका मान करने की परम्परा सदियों से चली आ रही है। भारत पुरुष प्रधान देश है लेकिन उनका अस्तित्व भी नारी बिना अधूरा है। जिस घर में बेटी होती है उस घर में खुशियों का मौका ढूंढा नहीं जाता। इसकी बानगी आप ज्योति गोयल के घर पर बने माहौल से ही समझ सकते है। नवजात शिशु के जाने पर वैसे ही मां की ममता रोते हुई दिखी जैसे बिटिया रानी का विदाई हो रहा हो।