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मुख्य खबरें/न्यूज़/sonbhadra news abhishek s light will remain alive even after death two people will get hope of light from the eyes of charity

Sonbhadra News: मौत के बाद भी जिंदा रहेगा अभिषेक का उजाला, दान की आंखों से दो लोगों को मिलेगी रोशनी की उम्मीद.

दिल्ली हादसे में जान गंवाने वाले रेणुकूट निवासी अभिषेक कुमार की आंखों की कॉर्निया परिजनों ने दान कर दी। अभिषेक दिल्ली विश्वविद्यालय में बीकॉम द्वितीय वर्ष का छात्र था और परिवार में सबसे छोटा था। मंगलवार को उसका पार्थिव शरीर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पहुंचा, जहां अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

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10:26 AM, Sep 8, 2026

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Sonbhadra News: मौत के बाद भी जिंदा रहेगा अभिषेक का उजाला, दान की आंखों से दो लोगों को मिलेगी रोशनी की उम्मीद.
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मणिकर्णिका घाट पर अभिषेक के अंतिम संस्कार में शामिल परिजन और दूसरी तस्वीर में अभिषेक कुमार का फाइल फोटो।

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Story By: अनुज जायसवाल।

सोनभद्र।

दिल्ली में हुए दर्दनाक हादसे में रेणुकूट निवासी अभिषेक कुमार की मौत ने परिवार के साथ-साथ परिचितों और क्षेत्र के लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया। जिस बेटे के भविष्य को लेकर परिवार ने न जाने कितने सपने संजोए थे, मंगलवार को उसी बेटे का पार्थिव शरीर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पहुंचा। यहां गमगीन माहौल में अभिषेक का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। बेटे को खोने का दर्द परिवार के लिए असहनीय है, लेकिन अभिषेक जाते-जाते ऐसा नेक काम कर गया, जिससे दो जरूरतमंद लोगों की जिंदगी में रोशनी आने की उम्मीद जगी है। अभिषेक दिल्ली विश्वविद्यालय में बीकॉम द्वितीय वर्ष का छात्र था। परिवार में वह सबसे छोटा था और अपने माता-पिता के साथ रेणुकूट स्थित हिंडाल्को कॉलोनी में रहता था। उसके पिता हिंडाल्को में क्रेन ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। बड़े भाई राजस्थान में बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। हादसे के समय अभिषेक की मां अपने गांव गई हुई थीं। बेटे की मौत की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।

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परिजनों के अनुसार, हादसे की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग अभिषेक का शव लेने दिल्ली पहुंचे। वहां बेटे की मौत के गम के बीच परिवार ने एक ऐसा फैसला लिया, जो अभिषेक की याद को हमेशा के लिए जीवित रखेगा। परिजनों ने उसकी आंखें दान करने का निर्णय लिया। इसके बाद अभिषेक की दोनों आंखों की कार्निया दान कराई गई। परिजनों का कहना है कि उनका बेटा भले ही अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी आंखों से किसी जरूरतमंद की जिंदगी में उजाला आ सकेगा। अभिषेक मूल रूप से चंदौली जिले के झांसी गांव का निवासी था। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार सुबह उसका पार्थिव शरीर वाराणसी लाया गया। पिता एंबुलेंस से बेटे का शव लेकर मणिकर्णिका घाट पहुंचे, जहां अंतिम संस्कार किया गया। एक ओर घाट पर बेटे को अंतिम विदाई देने का दर्द है, तो दूसरी ओर उसकी आंखों के जरिए दो जिंदगियों को नई रोशनी मिलने की उम्मीद परिवार को भावुक कर रही है। अभिषेक की मौत से रेणुकूट की हिंडाल्को कॉलोनी और उसके पैतृक गांव में शोक की लहर है। कम उम्र में दुनिया से विदा हुआ अभिषेक जाते-जाते मानवता की ऐसी मिसाल छोड़ गया, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।


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