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मुख्य खबरें/न्यूज़/sonbhadra news devotees performed pind daan of ancestors on the banks of son river in chopan

Sonbhadra News: चोपन में सोन नदी के तट पर श्रद्धालुओं ने किया पितरों का पिंडदान.

पितृ पक्ष के समापन पर चोपन नगर पंचायत स्थित सोन नदी के पवित्र तट पर श्रद्धालुओं ने पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण किया। पंडित सचिन तिवारी ने महालय अमावस्या का धार्मिक महत्व बताते हुए पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा पर प्रकाश डाला। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान कर अपने पितरों का स्मरण किया और परिवार की सुख-शांति की कामना की।

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11:06 AM, Oct 10, 2026

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Sonbhadra News: चोपन में सोन नदी के तट पर श्रद्धालुओं ने किया पितरों का पिंडदान.
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चोपन के पवित्र सोन नदी तट पर महालय अमावस्या के अवसर पर पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण और पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु एवं पंडित।

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Story By: चंदन कुमार, चोपन।

सोनभद्र।

पितृ पक्ष के समापन अवसर पर चोपन नगर पंचायत स्थित पवित्र सोन नदी के तट पर श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण किया। इस दौरान पंडितों के मार्गदर्शन में विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। श्रद्धालुओं ने अपने पितरों का स्मरण करते हुए उनसे परिवार की सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मांगा। सोन नदी के तट पर पूजा करा रहे पंडित सचिन तिवारी ने पितृ पक्ष के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि महालय अमावस्या पितृ पक्ष के समापन का दिन है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन उन पूर्वजों के निमित्त भी श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाया हो।

पंडित सचिन तिवारी ने कहा कि हिंदू धर्म में पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए पिंडदान और तर्पण की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि मनुष्य की मृत्यु के बाद आत्मा की आगे की यात्रा में धार्मिक संस्कारों का विशेष महत्व होता है। इसी आस्था के साथ लोग पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। उन्होंने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रद्धालु श्रद्धा और विश्वास के साथ सोन नदी के तट पर पहुंचकर अपने पितरों का पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन अनुष्ठानों के माध्यम से लोग अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।

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महालय अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है। पितृ पक्ष की अंतिम तिथि होने के कारण इसका विशेष महत्व है। इस अवसर पर श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य के माध्यम से लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं। चोपन में सोन नदी का तट भी इस धार्मिक परंपरा के निर्वहन का प्रमुख स्थल बना रहा। हालांकि तट पर फैली गंदगी को लेकर आदर्श नगर पंचायत के खिलाफ श्रद्धालुओं ने गुस्सा भी ज़ाहिर किया।


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