Chandauli News: भैसही और करेमुआ गांव टापू में तब्दील, मंगलवार सुबह तक नहीं पहुंची मदद, खोखले साबित हुए जिला प्रशासन के दावे.
"एक तरफ जहां प्रदेश की सरकार और जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावितों को हर संभव मदद पहुंचाने का दावा कर रही थी, ग्रामीणों का आक्रोश साफ इस बात को लेकर दिखा कि चकिया के भाजपा विधायक कैलाश खरवार तक उनकी सुध लेने नहीं पहुंचे, न ही चकिया तहसील प्रशासन का कोई गांव में पहुंचा"
chandauli
8:20 PM, Aug 26, 2025
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टापू में तब्दील भैसही गांव में बाढ़ में फंसे बच्चों को बाहर निकलते परिजन
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Story By: संतोष, ब्यूरो हेड, पूर्वांचल भास्कर.
चंदौली। लगातार हुई बारिश के बाद जहां पहाड़ी नदियां उफन गईं, वहीं बांधों से छोड़े गए भारी मात्रा में पानी से मैदानी इलाकों में तबाही मच गई। जिले के चकिया तहसील के आधा दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ गए, जिसमें दो गांव पूरी तरह टापू में तब्दील हो गए। आलम यह रहा कि इन गांवों में जाने का कोई रास्ता नहीं था। एक तरफ जहां प्रदेश की सरकार और जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावितों को हर संभव मदद पहुंचाने का दावा कर रही थी।
वही इन दो गांवों के बाढ़ में डूबने के बाद मंगलवार सुबह तक कोई मदद नहीं पहुंच पाई। हैरानी की बात तब रही कि जब मीडिया की टीम चार फीट पानी में होकर गांव में पहुंची, तो वहां के लोगों ने बताया कि न तो राजस्व कर्मी मौके पर आए, न तहसील प्रशासन का कोई प्रतिनिधि आया। जबकि जिलाधिकारी लगातार बाढ़ प्रभावित लोगों को मदद पहुंचने का दावा कर रहे हैं। इस बात को लेकर ग्रामीणों में काफी आक्रोश और नाराजगी देखने को मिली।
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आपको बता दें चकिया तहसील के भैसही गांव और करेमुआ गांव दोनों चंद्रप्रभा नदी के बाढ़ में पूरी तरह तबाह हो गए और टापू में तब्दील हो गए। इन दोनों गांव के साथ दुर्भाग्य रहा कि तेज बहाव के कारण आसपास का पूरा इलाका डूब गया और गांव में जो ऊंचा स्थान था, वहां पर गांव के ग्रामीण अपने मवेशियों के साथ रहने को मजबूर हो गए। चंद्रप्रभा नदी के बाढ़ में जहां सैकड़ों एकड़ धान की फसल चौपट हुई, वहीं किसानों द्वारा कर्ज लेकर गेंदा फूल और अन्य तरह के फूल की की गई खेती भी चौपट हो गई। कई किसानों ने बड़े पैमाने पर कर्ज लेकर फूल की खेती की थी, जो पूरी तरह बर्बाद हो गई।
ग्रामीणों की माने तो रविवार देर रात से ही गांव में पानी घुसना शुरू हो गया। आलम यह रहा कि उन लोगों ने सोमवार और मंगलवार को भी गांव के लेखपाल को फोन किया, तो लेखपाल ने कोई समुचित उत्तर नहीं दिया। हैरानी की बात यह रही कि सूचना के बाद भी न तो इस गांव में कोई नाव लगी और न ही कोई प्रशासनिक मदद मिल पाई। गांव के लोग जो खाद्यान्न बाढ़ के पानी से बचा पाए, उसी को बनाकर खाकर पिछले तीन दिन से अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आक्रोश साफ दिखा कि चकिया के भाजपा विधायक कैलाश खरवार तक उनकी सुध लेने नहीं पहुंचे, न ही चकिया तहसील प्रशासन का कोई गांव में पहुंचा। गांव में कई लोग बीमार हैं, जिनके इलाज के लिए दवा की व्यवस्था तक नहीं हो पाई है। हैरानी की बात ये है कि ये दोनों गांव बीजेपी समर्थकों वाले लोगों का गांव है। तब ये हाल है।



