Chandauli News: राशन की दुकान का निर्माण रह गया अधूरा, खाते से निकल गया निर्माण लागत का 9 लाख 75 हजार.
"रोहाखी गांव में मनरेगा के कार्य में जमकर लूट मची हुई है। जल्दबाजी में राशन की दुकान का शिलान्यास कराकर निर्माण कार्य पूर्ण दिखाकर 9 लाख 75 हजार की धनराशि निकाल ली गई है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी शहाबगंज दिनेश सिंह ने कहा कि यदि इस तरह की शिकायत है, तो जांच कर संबंध के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी"
chandauli
3:08 PM, Aug 19, 2025
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अधूरा राशन की दुकान
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Story By: गोविंद कुमार, चकिया तहसील.
चंदौली। शहाबगंज ब्लॉक के रोहाखी गांव में मनरेगा के कार्य में जमकर लूट मची हुई है। गांव में राशन की दुकान का शिलान्यास कराकर निर्माण कार्य पूर्ण दिखाकर 9 लाख 75 हजार की धनराशि निकाल ली गई है। जबकि शासन गांवों में राशन की दुकान निर्माण कराए जाने के लिए अधिकतम 7 लाख की धनराशि निर्धारित की है। इसके अलावा पंचायत भवन की बाउंड्री वॉल बनाने के नाम पर 4 लाख 99 हजार तथा पंचायत भवन के सामने 20 मीटर नाली निर्माण कराकर 1 लाख 99 हजार की धनराशि का भुगतान करा लिया गया। जबकि निर्माण कार्य में दोयम दर्जे की ईंट तथा मानक के विपरीत कार्य किया गया है।
शिलान्याश बोर्ड
बताते चलें कि शहाबगंज विकासखंड के अंतर्गत आने वाले रोहाखी गांव में राशन की दुकान निर्माण कराए जाने के लिए जहां शिलान्यास कराया गया है, वह पंचायत भवन की बाउंड्री के अंदर है। जिसका निर्माण होने के बाद भी कभी वह अपने पूरे अस्तित्व में दिखाई नहीं देगा। पंचायत भवन के पीछे इसी बाउंड्री में बचे छोटे जगह में राशन की दुकान का निर्माण कराया जाना है। पंचायत भवन के बाहर एक ही जगह राशन की दुकान, बाउंड्री वॉल तथा नाली निर्माण कराए जाने के शिलान्यास का बोर्ड भी लगाया गया है। जिस पर विधायक कैलाश जी आचार्य, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह तथा ग्राम प्रधान तीजा देवी का नाम भी अंकित है। मनरेगा के तहत कराए गए कार्य में दोयम दर्जे का ईंट और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
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पंचायत भवन की बाउंड्री के अंदर अधूरा पड़ा निर्माण
सबसे विचारणीय प्रश्न यह है कि गांवों में अधिकतम 7 लाख की धनराशि से राशन की दुकान का निर्माण कराया जाना है। जबकि शासन निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए रोहाखी गांव में राशन की दुकान का निर्माण कराने के लिए 9 लाख 75 हजार निकाल लिया गया है, जबकि अभी तक दुकान की नींव बनाने का काम पूरा किया गया है। एक तरफ मनरेगा के तहत गांवों में कराए गए मजदूरों के कार्य के भुगतान में कई महीने इंतजार करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ राशन की दुकान का निर्माण हुआ नहीं, बाउंड्री वॉल भी आधा-अधूरा रहने के बाद भी पूरे धन की निकासी कर ली गई है।



