Chandauli News: रेलवे अस्पताल में भर्ती सेवानिवृत्त आरपीएफ कर्मी की मौत, परिजनों का हंगामा.
"पहले भी इस तरह की लापरवाही पर जिले के सांसद वीरेंद्र सिंह द्वारा सवाल उठाए जा चुके हैं, बावजूद इसके व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। फिलहाल मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।"
chandauli
4:23 PM, Feb 6, 2026
Share:


रोते बिलखते परिजन
Daily ख़बरों के लिए फ़ॉलो करें
Story By: संदीप कुमार, बड़े बाबू, डीडीयू नगर (चंदौली).
चंदौली। डीडीयू रेल मंडल अंतर्गत मंडलीय लोको अस्पताल में सीने में दर्द की शिकायत पर भर्ती एक सेवानिवृत्त आरपीएफ कर्मी की शुक्रवार सुबह मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए और अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। परिजनों का कहना है कि समय रहते मरीज को रेफर नहीं किया गया, जिससे उनकी जान चली गई।
जानकारी के अनुसार आरपीएफ से सेवानिवृत्त जामवंत सिंह चौहान अमोघपुर गांव में मकान बनवाकर परिवार के साथ रहते थे। तीन फरवरी को सीने में दर्द की शिकायत पर परिजन उन्हें मंडलीय लोको अस्पताल में भर्ती कराए थे। वहां चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। मृतक के पुत्र काली प्रकाश सिंह ने आरोप लगाया कि उन्होंने बार-बार चिकित्सकों से कहा कि उनके पिता को आराम नहीं मिल रहा है और उन्हें किसी बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया जाए, लेकिन डॉक्टरों ने यह कहकर टाल दिया कि वे स्थिति संभाल लेंगे।
परिजनों का आरोप है कि दो दिन तक हालत में सुधार नहीं होने पर गुरुवार को जांच के लिए उन्हें हेरिटेज अस्पताल भेजा गया। जांच के बाद लौटने के बावजूद आराम नहीं मिलने पर बीती रात मरीज को नींद का इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद शुक्रवार सुबह उनकी मौत हो गई। परिजनों ने डॉ. आरपी सिंह और डॉ. कोकिला पर आरोप लगाया कि बार-बार रेफर करने का अनुरोध करने के बावजूद लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र भेज दिया गया होता तो शायद उनकी जान बच सकती थी।
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन के खिलाफ परिजनों और अमोघपुर गांव के लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। परिजनों ने मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडलीय रेल अस्पताल में रेफर न करने को लेकर यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस तरह की लापरवाही पर जिले के सांसद वीरेंद्र सिंह द्वारा सवाल उठाए जा चुके हैं, बावजूद इसके व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। फिलहाल मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
