Chandauli News: मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान निकली प्राचीन प्रतिमा, शिव-पार्वती और गणेश की एकाश्म मूर्ति देख उमड़े श्रद्धालु.
"हालांकि प्रतिमा की वास्तविक प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व का आधिकारिक आकलन संबंधित पुरातत्व विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल क्षेत्र में इस दुर्लभ प्रतिमा की चर्चा जोरों पर है और श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार मंदिर पहुंच रही है।"
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8:13 PM, Jun 15, 2026
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खुदाई के दौरान निकली प्राचीन प्रतिमा
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Story By : पूर्वांचल भास्कर डेस्क.
चंदौली। चहनिया ब्लॉक क्षेत्र के लक्ष्मणगढ़ स्थित लक्षुब्रह्म बाबा मंदिर परिसर में पर्यटन विकास कार्य के दौरान खुदाई करते समय एक प्राचीन एवं दुर्लभ प्रतिमा मिलने से क्षेत्र में उत्सुकता और श्रद्धा का माहौल है। एक ही शिलाखंड पर उकेरी गई इस प्रतिमा में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की आकृतियां स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं।
जानकारी के अनुसार मंदिर परिसर में शासन की ओर से पर्यटन विकास से जुड़े निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में मजदूर मंदिर परिसर में लगभग चार फीट गहरी खुदाई कर रहे थे। खुदाई के दौरान अचानक फावड़ा किसी ठोस पत्थर से टकराया। किसी महत्वपूर्ण वस्तु की आशंका होने पर मजदूरों ने कार्य रोक दिया और इसकी सूचना मंदिर के पुजारी रामदयाल मिश्रा को दी।सूचना मिलते ही पुजारी मौके पर पहुंचे और गंगाजल के साथ सावधानीपूर्वक मिट्टी हटाने का कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे जब शिलाखंड साफ हुआ तो उसमें भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की प्रतिमाएं उभरकर सामने आईं। प्रतिमा के दर्शन होते ही वहां मौजूद लोग श्रद्धा से अभिभूत हो उठे। मामले की जानकारी मिलते ही 'श्री लक्षुब्रह्म बाबा समिति' के संरक्षक प्रिंस मिश्रा उर्फ ध्रुव और सचिव गणेश सिंह भी मौके पर पहुंच गए। श्रद्धालुओं ने गड्ढे में ही प्रतिमा का पूजन-अर्चन किया। फूल-माला अर्पित कर धूप-दीप के साथ आरती उतारी गई। घटना की सूचना फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए मंदिर पहुंचने लगे।
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मंदिर के पुजारी रामदयाल मिश्रा ने बताया कि प्रतिमा के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए समिति की विशेष बैठक बुलाई गई है। बैठक में विशेषज्ञों और समिति के सदस्यों से विचार-विमर्श के बाद प्रतिमा को पूरे विधि-विधान के साथ बाहर निकालकर मंदिर परिसर में उचित स्थान पर स्थापित करने का निर्णय लिया जाएगा। हालांकि प्रतिमा की वास्तविक प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व का आधिकारिक आकलन संबंधित पुरातत्व विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल क्षेत्र में इस दुर्लभ प्रतिमा की चर्चा जोरों पर है और श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार मंदिर पहुंच रही है।
