Chandauli News: माघ मेला विवाद पर बोले डॉ. इंद्रेश कुमार, जहां देवत्व और मानवता, वहां नहीं टिक पाती शैतानी ताकतें.
"डॉ. इंद्रेश कुमार चंदौली जिले के समुदपुर क्षेत्र में जय भारत मंच काशी प्रांत द्वारा आयोजित “सर्वधर्म समाज एवं अनेकता में एकता” विषयक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। कार्यक्रम का आयोजन जय भारत मंच के काशी प्रांत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह गुड्डू द्वारा किया गया था।"
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8:43 PM, Jan 21, 2026
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मीडिया के सवालों का जवाब देते डॉक्टर इंद्रेश कुमार
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Story By: संतोष, ब्यूरो हेड, पूर्वांचल भास्कर.
चंदौली। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच हुए विवाद को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं जय भारत मंच के मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि माघ मेला केवल प्रयागराज तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ आयोजित होता है। अगर कोई थोड़ी-बहुत शरारत करने की कोशिश करता भी है, तो उसे कोई सकारात्मक फल नहीं मिलता।
डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि जहां देवताओं का वास होता है, वहां मानवता का भी वास होता है और ऐसे स्थानों पर शैतानी या राक्षसी प्रवृत्तियां अधिक समय तक नहीं टिक पातीं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग स्वभाववश हर विषय को सरकार और प्रशासन के विरोध से जोड़ देते हैं, लेकिन ऐसे रवैये से समाज में शांति नहीं बनती।
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उन्होंने सभी से संयम और सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि चाहे कोई भी हो और कहीं भी हो, सभी को शांति और सद्भाव के साथ रहना चाहिए। समाज को जोड़ने वाली सोच ही देश को मजबूत बनाती है। अखंड और खंडित भारत के मुद्दे पर बोलते हुए डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि वर्ष 1947 में देश का विभाजन हुआ, जिसे दुनिया आज भी “खंडित भारत” के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस ने 1943 में अंडमान-निकोबार में अखंड भारत की आजादी की घोषणा की थी और उसे बनाए रखने का प्रयास भी किया गया था।
उन्होंने कहा कि 1857 से पहले भारत के आसपास के कई क्षेत्र आज अलग-अलग देशों के रूप में अस्तित्व में हैं, जो कभी भारत का हिस्सा थे। इसी कारण अखंड भारत की चर्चा समय-समय पर होती रहती है। डॉ. इंद्रेश कुमार ने पाकिस्तान और बांग्लादेश का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां अल्पसंख्यकों सहित कई समुदायों पर अत्याचार की खबरें लगातार सामने आती रहती हैं, जिससे असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों को आपसी और अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचार से मुक्त होना चाहिए, तभी स्थायी शांति संभव है।
