Chandauli News: दो बच्चों की मौत से गांव में छाया मातम, छठ पूजा का उत्साह, सन्नाटे में तब्दील.
"मृतक अमित पूरा बलुआ स्थित बाबा फलाहारी इंटर कालेज में कक्षा 8 का छात्र था। इनके पिता मुंबई में एक प्राइवेट नौकरी करते हैं, जो दीपावली पर घर आए थे। वहीं सत्यम महुअर स्थित एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा 4 का छात्र था। इनके पिता विदेश में नौकरी करते हैं, जो दो दिन पहले पूजा में घर आए थे।"
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1:32 AM, Oct 28, 2025
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मृतक अमित के घर रोते बिलखते परिजन
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Story By: पूर्वांचल भास्कर डेस्क।
चंदौली। बलुआ थाना क्षेत्र के पूरा विजयी गांव में छठ पूजा के दौरान हुए हादसे में 13 वर्षीय अमित प्रजापति और 12 वर्षीय सत्यम यादव गंगा में डूब गए और उनकी मौत से गांव गमगीन हो उठा। उत्सव का माहौल मातम में बदल गया; कुछ महिलाएं बेहोश रहीं तो पुरुष सदमे में थे। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार को शव आने पर परिजन कराह उठे। सुबह बलुआ एसओ ने दोनों का अंतिम संस्कार बलुआ घाट पर कराया; पूरे गांव की आँखें नम थीं।
सोहन प्रजापति के पुत्र अमित अपनी माँ मुन्नी देवी के साथ और दिनेश यादव के पुत्र सत्यम अपनी माँ रिक्की देवी के साथ रविवार शाम चंद्रावती घाट पर छठ पूजा के लिए जा रहे थे। महिलाएं गीत गाती घाट की तरफ जा रही थीं, जबकि दोनों बच्चे परिजनों से पहले घाट पर पहुँच गए और मांएँ बेदी बनाने में व्यस्त हो गईं। बच्चे बिना बोले कपड़े उतारकर नहाने लगे, लेकिन भीड़ के कारण परिजन उनकी तरफ ध्यान नहीं दे सके और वे डूबने लगे। घाट पर मौजूद लोगों ने शोर मचाया। महुअर चौकी इंचार्ज, टेंट और लाइटिंग करने वाले भी मौजूद थे; इंचार्ज ने तुरंत बलुआ एसओ अतुल कुमार को जानकारी दी।
बलुआ एसओ और ग्रामीणों ने दोनों को बाहर निकाला । सत्यम के परिजन एम्बुलेंस से वाराणसी ले गए, जबकि अमित को बलुआ के चहनियां प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ले जाया गया, जहाँ फार्मासिस्ट मुकेश सिंह ने मुंह से सीपीआर दिया। डॉक्टरों ने तुरंत रेफर किया और बलुआ एसओ अपनी गाड़ी लेकर बीएचयू पहुँचा; एम्बुलेंस बाद में पहुँची। बीएचयू में रात को दोनों की मौत हुई और उनका पोस्टमार्टम किया गया। सोमवार को शव लौटते ही परिजन बेकाबू हो गए और सुबह दोनों का अंतिम संस्कार बलुआ घाट पर किया गया, जिसमें सत्यम और अमित के पिता ने मुखाग्नि दी।
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मृतक अमित पूरा बलुआ स्थित बाबा फलाहारी इंटर कालेज में कक्षा 8 का छात्र था। इनके पिता मुंबई में एक प्राइवेट नौकरी करते हैं, जो दीपावली पर घर आए थे। वहीं सत्यम महुअर स्थित एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा 4 का छात्र था। इनके पिता विदेश हुमान में नौकरी करते हैं, जो दो दिन पहले पूजा में घर आए थे।
दोनों के पिता को क्या पता था कि खुशी मातम में बदल गई। पूरे गांव में छठ पूजा की एक अलग ही उत्साह होती है, किंतु इस बार मासूमों की मौत से कहीं कोई भी गाजा-बाजा या फिर डीजे नहीं बजाया गया। कुछ लोग साधारण तरीके से छठ पूजा में सम्मिलित हुए।



