Chandauli News: गोबर गैस से आत्मनिर्भर बना एकौनी गांव,युवा उद्यमी के प्रयास से 125 घरों में जल रहे चूल्हे.
"चंद्रप्रकाश सिंह ने बताया कि आने वाले समय में इस योजना का विस्तार कर आसपास के गांवों को भी इससे जोड़ने की योजना है। एकौनी गांव की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक ऊर्जा के सफल उपयोग का उदाहरण बनकर सामने आई है और अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का काम कर रही है।"
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8:48 PM, Apr 7, 2026
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अपने बायोगैस प्लांट के बारे में जानकारी देते युवा उधमी चंद्र प्रकाश सिंह
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Story By: धर्मेंद्र जायसवाल, ब्यूरो चंदौली.
चंदौली। ईरान और इजरायल, अमेरिका युद्ध के बीच और देश में एलपीजी किल्लत की समस्या के दौरान डीडीयू नगर तहसील क्षेत्र का एकौनी गांव इन दिनों ऊर्जा आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर उभर रहा है। यहां एलपीजी की बढ़ती किल्लत के बीच ग्रामीणों ने गोबर गैस को सफल विकल्प के रूप में अपनाया है। गांव के करीब 120 से 125 घरों में पाइपलाइन के जरिए बायोगैस की आपूर्ति हो रही है, जिससे लोगों को रसोई गैस के लिए बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
इस पहल की शुरुआत गांव के युवा उद्यमी चंद्रप्रकाश सिंह ने की। उन्होंने बड़े स्तर पर गौशाला स्थापित कर गोबर से गैस उत्पादन का मॉडल तैयार किया। अब यही बायोगैस प्लांट पूरे गांव के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत बन चुका है। गांव में बिछाई गई पाइपलाइन के जरिए निर्धारित समय पर सुबह और शाम गैस की आपूर्ति की जाती है, जिससे आसानी से खाना बन जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस व्यवस्था से उन्हें कई तरह के फायदे हुए हैं। एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग, कीमत और उपलब्धता की चिंता खत्म हो गई है। कम खर्च में महीने भर रसोई गैस मिल रही है, जिससे घरेलू बजट भी संतुलित हो रहा है। महिलाओं के लिए यह व्यवस्था खासतौर पर सुविधाजनक साबित हो रही है।
गांव की महिलाओं ने बताया कि गोबर गैस न केवल सस्ती है, बल्कि सुरक्षित भी है। इससे धुआं कम निकलता है और रसोई का वातावरण भी बेहतर रहता है। वहीं, स्थानीय स्तर पर तैयार होने के कारण गैस की आपूर्ति भी नियमित बनी रहती है। इस मॉडल की खास बात यह है कि यह पूरी तरह स्थानीय संसाधनों पर आधारित है। इससे न सिर्फ ऊर्जा की जरूरत पूरी हो रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिल रहा है।
चंद्रप्रकाश सिंह ने बताया कि आने वाले समय में इस योजना का विस्तार कर आसपास के गांवों को भी इससे जोड़ने की योजना है। एकौनी गांव की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक ऊर्जा के सफल उपयोग का उदाहरण बनकर सामने आई है और अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का काम कर रही है।
