Chandauli News: सपा नेताओं समेत 250 अज्ञात पर एफआईआर, धरना-प्रदर्शन के बाद बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी.
"एफआईआर की सूची सार्वजनिक होने के बाद जिले में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।"
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11:41 AM, Jun 21, 2026
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कलेक्ट्रेट जाते समय धक्का मुक्की के दौरान पूर्व सपा विधायक का कॉलर पकड़ते पुलिस अधिकारी
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Story By : संदीप कुमार, बड़ा बाबू, डीडीयू नगर (चंदौली).
चंदौली। जिला मुख्यालय पर समाजवादी पार्टी के धरना-प्रदर्शन के दौरान हुई नोकझोंक और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने के आरोप में दर्ज मुकदमे की नामजद सूची सामने आने के बाद जिले की राजनीति गरमा गई है। पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में समाजवादी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को नामजद किया गया है, जबकि 200 से 250 अज्ञात समर्थकों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात व्यक्तियों की पहचान करने में जुटी है।
एफआईआर में पूर्व विधायक मनोज सिंह उर्फ डब्लू, सपा जिलाध्यक्ष सत्यानारायण राजभर, सांसद प्रतिनिधि नवीन सिंह, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी चंद्रशेखर यादव, जिला पंचायत सदस्य अंजनी सिंह, सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज सिंह काका, पूर्व अध्यक्ष मुसाफिर सिंह चौहान, पिछड़ा वर्ग जिलाध्यक्ष डॉ. विनोद बिंद तथा जिला महासचिव नफीस अहमद उर्फ गुड्डू सहित कई नेताओं को नामजद किया गया है। पुलिस का आरोप है कि धरना-प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया।
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गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने स्मार्ट मीटर, बिजली बिल, नहरों में पानी की उपलब्धता, गंगा कटान और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया था। ज्ञापन सौंपने के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई थी। इसके बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं समाजवादी पार्टी ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन से जोड़ते हुए प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनहित के मुद्दों को उठाने पर मुकदमे दर्ज करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। एफआईआर की सूची सार्वजनिक होने के बाद जिले में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
