Chandauli News: घुरहूपुर बौद्ध स्थल पर पहुंचा वियतनाम के भिक्षुओं का दल, विश्व शांति की कामना.
"चंदौली के घुरहूपुर बौद्ध स्थल पर सोमवार को वियतनाम के बौद्ध भिक्षुओं का 13 सदस्यीय दल पहुंचा। पहाड़ी पर प्राचीन बौद्ध अवशेषों के दर्शन कर भिक्षुओं ने विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की।"
chandauli
10:20 PM, Sep 28, 2026
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बौद्ध स्थल पर दर्शन करते बौद्ध भिक्षु
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Story By : रतिश कुमार, शहाबगंज, चंदौली.
चंदौली। शहाबगंज ब्लॉक क्षेत्र के घुरहूपुर स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले बौद्ध स्थल पर सोमवार को श्रीलंका के नेतृत्व में वियतनाम के बौद्ध भिक्षुओं का 13 सदस्यीय दल पहुंचा। प्रसिद्ध वियतनामी बौद्ध भिक्षु वेन थिक मीन क्वांग के साथ पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने पहाड़ी पर स्थित भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया और श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए विश्व शांति तथा मानव कल्याण की कामना की। इसके बाद दल ने घुरहूपुर की पहाड़ी पर मौजूद प्राचीन गुफाओं, भित्ति चित्रों और अन्य बौद्ध अवशेषों का बारीकी से अवलोकन किया। भिक्षुओं ने स्थल की ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता के बारे में जानकारी ली तथा यहां की प्राकृतिक सुंदरता की भी सराहना की।
इस दौरान श्रीलंका के बौद्ध भिक्षु अशोक वंश ने कहा कि भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र स्थलों का दर्शन करना उनके लिए आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने कहा कि भारत भगवान बुद्ध की तपोभूमि और ज्ञानभूमि है, जहां आने पर बुद्ध के जीवन, उनके संदेश और उनसे जुड़ी प्राचीन धरोहरों को करीब से जानने का अवसर मिलता है। उनके अनुसार घुरहूपुर की पहाड़ी पर मौजूद प्राचीन गुफाएं, भित्ति चित्र और बौद्ध अवशेष भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। उन्होंने इन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और व्यवस्थित विकास की आवश्यकता बताई, ताकि देश-विदेश से आने वाले बौद्ध अनुयायी इनके महत्व को समझ सकें और भारत की प्राचीन संस्कृति से जुड़ सकें।
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भिक्षुओं ने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश किसी एक देश या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि करुणा, शांति, अहिंसा और मानव कल्याण का संदेश पूरी दुनिया के लिए है। वहीं बौद्ध संस्थान के अध्यक्ष वशिष्ठ मौर्य ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि घुरहूपुर का बौद्ध स्थल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और यहां देश-विदेश से बौद्ध अनुयायियों तथा पर्यटकों का आगमन होता रहता है। उन्होंने कहा कि यदि स्थल का संरक्षण और विकास व्यवस्थित तरीके से किया जाए तो घुरहूपुर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन के मानचित्र पर अपनी पहचान बना सकता है। इस दौरान भंते चंदन, गोविन्द मौर्य, ओम प्रकाश, रमाशंकर राजभर, महेन्द्र राजभर, चिथरु राजभर सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।



