Chandauli News: अनुदेशकों के हक में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अनुदेशकों में खुशी की लहर.
"गौरतलब है कि अनुदेशक वर्ष 2013 से मानदेय बढ़ाने और नियमित किए जाने की मांग कर रहे थे। इस संबंध में दायर याचिका पर पहले हाईकोर्ट ने अनुदेशकों के पक्ष में फैसला सुनाया था। राज्य सरकार द्वारा उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार की याचिका को खारिज करते हुए अनुदेशकों के हक में अंतिम मुहर लगा दी।"
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11:18 PM, Feb 4, 2026
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अनुदेशक संघ के वाराणसी मंडल अध्यक्ष विकास यादव
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Story By: रतीश कुमार, शहाबगंज, (चंदौली).
चंदौली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों को नियमित माने जाने और ₹17,000 मासिक मानदेय दिए जाने के फैसले से जिलेभर के अनुदेशकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस निर्णय को वर्षों से चल रहे संघर्ष की बड़ी जीत माना जा रहा है। अनुदेशक संघ के वाराणसी मंडल अध्यक्ष विकास यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब अनुदेशकों की नौकरी पर समाप्ति की तलवार नहीं लटकेगी। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने अपने स्पष्ट आदेश में कहा है कि संविदा की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी अनुदेशकों की सेवाएं स्वतः समाप्त नहीं की जा सकतीं। लगातार दस वर्षों तक सेवा देने के कारण यह पद स्वतः सृजित माना जाएगा।
वहीं अनुदेशक संघ के जिलाध्यक्ष अभिनव सिंह ने कहा कि ₹17,000 मासिक मानदेय मिलने से अनुदेशक आर्थिक रूप से सशक्त होंगे। नियमित माने जाने के बाद अनुदेशकों को भविष्य की सुरक्षा और सामाजिक सम्मान मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ अनुदेशकों को स्थायित्व प्रदान करेगा। गौरतलब है कि अनुदेशक वर्ष 2013 से मानदेय बढ़ाने और नियमित किए जाने की मांग कर रहे थे। इस संबंध में दायर याचिका पर पहले हाईकोर्ट ने अनुदेशकों के पक्ष में फैसला सुनाया था। राज्य सरकार द्वारा उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार की याचिका को खारिज करते हुए अनुदेशकों के हक में अंतिम मुहर लगा दी। फैसले की खबर मिलते ही क्षेत्र के अनुदेशकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया और इसे अपने संघर्ष की ऐतिहासिक जीत बताया।
