Chandauli News: आवास योजना की पोल खोलती घटना, प्रशासनिक लापरवाही से गई महिला की जान.
"मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साई ने मामले की जांच और आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। हालांकि ग्रामीणों में यह आशंका बनी हुई है कि कहीं यह भी संसदीय वादों की तरह फाइलों में दब न जाए। शांति की मौत सिर्फ ठंड की मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की बेरुखी का परिणाम है। यह घटना सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक ढीलेपन पर बड़ा सवाल खड़ा करती है"
chandauli
4:33 PM, Dec 9, 2025
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मृतका शांति के शव के पास मौजूद परिजन इकट्ठा ग्रामीण
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Story By: गोविंद कुमार, चकिया तहसील.
चंदौली। सरकारी आवास योजना की हकीकत एक बार फिर बेनकाब हुई है। चकिया ब्लॉक के हिनौती उत्तरी गांव में रहने वाली 40 वर्षीय शांति की मौत ने व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया। बारिश में कच्चा घर ढह जाने के बाद शांति अपने पति चुल्लहन के साथ महीनों से तिरपाल के नीचे जिंदगी गुजार रही थीं, लेकिन न उन्हें आवास मिला और न ही उचित मदद। सोमवार की सुबह कड़ाके की ठंड के बीच शांति ने दम तोड़ दिया।
बता दें चुल्लहन मजदूरी कर किसी तरह गुजारा करते हैं। दंपति की कोई संतान नहीं थी। घर ढहने के बाद न ग्राम पंचायत ने आसरा दिया, न ब्लॉक स्तर से कोई राहत पहुंची। गांव की समाजसेवी संजू पटेल ने तिरपाल खरीदकर दिया और 4,000 रुपये का मुआवजा दिलवाया, लेकिन आवास के लिए की गई अर्जी बार-बार खारिज कर दी गई। ग्राम प्रधान अनिल कुमार सिंह और ब्लॉक के सेक्रेटरी संदीप कुमार सोनकर तक शिकायत पहुंचने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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शांति ठंड से जूझती रहीं और आखिरकार उनकी जान चली गई। विडंबना यह कि ग्राम प्रधान मौत को “टीवी बीमारी” बताकर पल्ला झाड़ते नजर आए, जबकि सेक्रेटरी का कहना है कि “जियो टैगिंग 15 दिन पहले हो गई थी, धन आएगा तो आवास मिलेगा।”गांव वालों ने चंदा इकट्ठा कर शांति का अंतिम संस्कार किया। मौके पर पहुंचे विधायक कैलाश आचार्य ने आर्थिक सहायता दी, लेकिन लोगों का सवाल है. जब तक धन आएगा, तब तक कितनी और गरीब महिलाएं इसी तरह मौत का इंतजार करेंगी?
मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साई ने मामले की जांच और आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। हालांकि ग्रामीणों में यह आशंका बनी हुई है कि कहीं यह भी संसदीय वादों की तरह फाइलों में दब न जाए। शांति की मौत सिर्फ ठंड की मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की बेरुखी का परिणाम है। यह घटना सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक ढीलेपन पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।



