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मुख्य खबरें/न्यूज़/chandauli news many villages submerged in flood waters in the coastal area of ganga

Chandauli News: गंगा के तटीय इलाके में बाढ़ के पानी में डूबे कई गांव.

"लगातार तीसरे दिन गंगा के बढ़ाव से लोग परेशान, पीडीडीयू नगर तहसील क्षेत्र के आधा दर्ज गांव में पंहुचा गंगा का पानी"

chandauli

12:27 PM, Aug 5, 2025

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Chandauli News: गंगा के तटीय इलाके में बाढ़ के पानी में डूबे कई गांव.
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मढ़िया पड़ाव इलाके में पंहुचा गंगा का पानी

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 Story By: पूर्वांचल भास्कर डेस्क.

 चंदौली। लगातार गंगा की बढ़ोत्तरी से पीडीडीयू नगर तहसील क्षेत्र के लगभग आधा दर्जन गांवों में जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बहादुरपुर, कुंडा, रतनपुर, सूजाबाद और डोमरी इन सभी गांवों में गंगा का पानी घरों में घुस गया है, जिससे लोगों को बाढ़ चौकियों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं मुगलसराय-चहनियां मुख्य मार्ग पर पानी खतरे के स्तर से ऊपर होने के कारण आवागमन पर रोक लगा दी गई है। बहादुरपुर और कुंडा गांव का पूरा सिवान पानी में डूब गया है, जिससे धान की फसल पूरी तरह नष्ट होने की संभावना है। पशुओं के लिए विशेषकर काफी परेशानियां हो गई हैं, पशुपालकों द्वारा बोया गया चारा पूरी तरह जलमग्न हो गया है। बहादुरपुर-भूपाली मार्ग पर स्थित फाटक को डांडी और मड़िया के निवासियों ने नहीं खोलने दिया है, जिससे बने पुलिया के ऊपर से पानी डांडी और मड़िया के सिवान में जाना शुरू हो गया है। डोमरी से रतनपुर की तरफ दो अगस्त की रात्रि से पानी काफी तेजी से ग्रामीण क्षेत्र में प्रवेश कर गया है, जिससे रतनपुर और डोमरी के मुख्य मार्ग पर पानी होने के कारण आवागमन प्रभावित हो गया है।

वहीं नायब तहसीलदार अमित कुमार ने बताया कि बहादुरपुर गांव की मलहिया बस्ती से लगभग 40 घरों के लोग 200 की संख्या में बाढ़ चौकी पर शरण लिए हुए हैं। यदि यही स्थिति रही तो बाढ़ चौकियों पर लोगों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। वहीं क्षेत्र में उफनाई गंगा नदी का पानी कैली, कुरहना, रौना, भूपौली, टड़ियां, सैदपुरा सहित तमाम गांवों में अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। मुगलसराय-चहनियां व पड़ाव भूपौली मार्ग पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। कई घर पानी से पूरी तरह घिर गए हैं। गांव के लोग पलायन करने पर मजबूर हो गए हैं। धान की फसल डूबने के साथ-साथ पशुओं का चारा भी डूब गया है। ग्रामीण पशुओं को सड़क किनारे ऊंचे स्थान पर सुरक्षित रख रहे हैं। लगातार दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहे पानी के कारण ग्रामीण दहशत के साये में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।


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