Chandauli News: एक बार फिर विवादों में घिरे मुगलसराय विधायक, गुरु रविदास स्वागत द्वार हटाने पर लोगों में नाराजगी.
"बहुजन बोधी समाज संघर्ष समिति ने अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग, मुगलसराय विधायक और उपजिलाधिकारी को पत्र देकर मांग की है कि जहां पहले गुरु रविदास जी का स्वागत द्वार लगाया गया था, उसी स्थान पर उसे दोबारा स्थापित कराया जाए ताकि सामाजिक सौहार्द और शांति बनी रहे।"
chandauli
5:04 PM, May 22, 2026
Share:


संत रविदास जी का बोर्ड हटाने और सरदार वल्लभ भाई पटेल का बोर्ड लगाने को लेकर हुआ विवाद
Daily ख़बरों के लिए फ़ॉलो करें
Story By: संदीप कुमार, बड़ा बाबू, डीडीयू नगर (चंदौली).
चंदौली। मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र के साहूपुरी मुख्य मार्ग स्थित चौरहट तिराहे पर लगाए गए स्वागत द्वार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बहुजन बोधी समाज संघर्ष समिति (BBS3) और स्थानीय लोगों ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार विधायक निधि से क्षेत्र में विभिन्न महापुरुषों और संतों के सम्मान में फोटोयुक्त फ्लैश बोर्ड गेट लगाए जा रहे हैं। इसी क्रम में 11 मई 2026 को चौरहट तिराहे पर संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम और चित्र वाला स्वागत द्वार लगाया गया था। आरोप है कि 19 मई को उक्त बोर्ड हटाकर उसी स्थान पर सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम का फ्लैश बोर्ड स्थापित कर दिया गया। इसे लेकर गुरु रविदास में आस्था रखने वाले लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
विज्ञापन
काशी विश्वनाथ कॉलोनी अलीनगर निवासी डॉ. रवि कुमार ने कहा कि वे सरदार पटेल का सम्मान करते हैं, लेकिन पहले से लगे गुरु रविदास जी के स्वागत द्वार को हटाए जाने से अनुयायियों में असंतोष और आक्रोश की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से वार्ता के दौरान उन्हें जानकारी दी गई कि यह बदलाव कथित तौर पर ठेकेदार की गलती के कारण हुआ और बाद में बोर्ड हटा दिया गया। हालांकि उन्होंने सवाल उठाया कि यदि स्थान तय नहीं था तो पहले वहां बोर्ड क्यों लगाया गया और बाद में हटाने की जरूरत क्यों पड़ी।
बहुजन बोधी समाज संघर्ष समिति ने अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग, मुगलसराय विधायक और उपजिलाधिकारी को पत्र देकर मांग की है कि जहां पहले गुरु रविदास जी का स्वागत द्वार लगाया गया था, उसी स्थान पर उसे दोबारा स्थापित कराया जाए ताकि सामाजिक सौहार्द और शांति बनी रहे। फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
