Chandauli News: भूमि विवाद में कार्रवाई न होने से तहसील दिवस पर आमरण अनशन पर बैठे नायब तहसीलदार.
“हमीरपुर में तैनात नायब तहसीलदार हिम्मत बहादुर सिंह चंदौली सदर तहसील में भूमि विवाद के निस्तारण की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठ गए। उन्होंने राजस्व कर्मियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया, जबकि तहसील प्रशासन ने मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी है।”
chandauli
9:42 PM, Jul 18, 2026
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तहसील परिसर में आमरण अनशन पर बैठे नायब तहसीलदार हिम्मत बहादुर सिंह।
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Story By: पुनवासी यादव, सकलडीहा, चंदौली.
चंदौली। जिलास्तरीय संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान शनिवार को सदर तहसील परिसर में उस समय अलग स्थिति देखने को मिली, जब हमीरपुर जनपद के सदर तहसील में तैनात नायब तहसीलदार हिम्मत बहादुर सिंह अपनी भूमि संबंधी समस्या को लेकर आमरण अनशन पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि जुलाई 2025 से उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारी विपक्षी पक्ष से मिलीभगत कर उनकी भूमि पर कब्जा कराने में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होगा, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा। समाधान दिवस में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी के बावजूद उनका धरना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
नवही गांव निवासी हिम्मत बहादुर सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2012-13 में सकलडीहा तहसील में अमीन के रूप में सेवा शुरू की थी। बाद में राजस्व निरीक्षक और वर्ष 2021 में पदोन्नत होकर नायब तहसीलदार बने। वर्तमान में उनकी तैनाती हमीरपुर सदर तहसील में है। उन्होंने बताया कि मार्च 2025 में सेवखर कला गांव में करीब सवा दो बिस्वा भूमि की रजिस्ट्री कराई थी। इसके बाद धारा 30(2) के तहत कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को आवेदन दिया, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी पत्रावली संबंधित लेखपाल के स्तर पर लंबित पड़ी है। उनका आरोप है कि कई बार लिखित और मौखिक शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और 7 जुलाई 2026 से उनकी भूमि पर कब्जा कराया जा रहा है। क्षेत्रीय कानूनगो और लेखपाल से शिकायत करने पर भी राहत नहीं मिली, जिसके चलते उन्हें आमरण अनशन का निर्णय लेना पड़ा।
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वहीं, संबंधित कानूनगो और लेखपाल ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। तहसीलदार अनुराग सिंह ने कहा कि मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इधर, समाधान दिवस में पहुंचे फरियादियों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना रहा। लोगों का कहना था कि जब राजस्व विभाग का एक अधिकारी ही अपनी समस्या के समाधान के लिए धरने पर बैठने को मजबूर है, तो आम नागरिकों की शिकायतों के निस्तारण की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
