Chandauli News: मौनी अमावस्या पर पश्चिम वाहिनी गंगा में आस्था का महास्नान, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब.
"मेले में चाट, पकौड़ी, जलेबी सहित विभिन्न व्यंजनों की दुकानों पर लोगों की खासी भीड़ देखी गई। बच्चों ने झूले और चरखी का आनंद लेकर पर्व की खुशियों को दोगुना कर दिया। कुल मिलाकर मौनी अमावस्या का पर्व बलुआ घाट पर शांति, सुरक्षा और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ, जिसने एक बार फिर पश्चिम वाहिनी गंगा की धार्मिक महिमा को उजागर किया।"
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4:55 PM, Jan 18, 2026
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बलुआ स्थित पश्चिम वाहिनी गंगा तट पर स्नान करते श्रद्धालु
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Story By: पूर्वांचल भास्कर डेस्क.
चंदौली। मौनी अमावस्या का पावन पर्व रविवार को श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पश्चिम वाहिनी गंगा के प्रसिद्ध बलुआ घाट पर भोर से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। घाट हर-हर गंगे और जय मां गंगा के जयकारों से गूंजता रहा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य कर पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। एसडीएम सकलडीहा कुंदन राज कपूर, सीओ स्नेहा तिवारी तथा थानाध्यक्ष बलुआ अतुल कुमार के नेतृत्व में बलुआ घाट से लेकर चहनियां तक पुलिस और प्रशासनिक अमला मुस्तैद रहा।
हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या को अत्यंत पुण्यदायी पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दान और जप-तप करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से इस दिन मौन रहकर स्नान करने से आत्मशुद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इसी धार्मिक मान्यता के चलते दूर-दराज से श्रद्धालु बलुआ घाट पहुंचकर पुण्य स्नान करते हैं। बलुआ घाट स्थित पश्चिम वाहिनी गंगा का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। यहां गंगा नदी पश्चिम दिशा में प्रवाहित होती है, जिसे दुर्लभ और अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
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मान्यता है कि पश्चिम वाहिनी गंगा में स्नान करने से कई गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के कारण मौनी अमावस्या, मकर संक्रांति और अन्य प्रमुख पर्वों पर यहां हर वर्ष श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए जिला पंचायत द्वारा घाट पर बैरिकेटिंग, प्रकाश व्यवस्था तथा खोया-पाया केंद्र की व्यवस्था की गई थी। गंगा सेवा समिति के अध्यक्ष दीपक जायसवाल द्वारा रात से ही खोया-पाया केंद्र की घोषणा लगातार कराई जाती रही। गंगा नदी में प्रशिक्षित गोताखोरों की टीम को विशेष निगरानी में लगाया गया था, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटा जा सके। वहीं गंगा सेवा समिति के स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की सहायता में लगातार जुटे रहे।
स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने घाट परिसर में लगे मेले का भी जमकर आनंद लिया। मेले में चाट, पकौड़ी, जलेबी सहित विभिन्न व्यंजनों की दुकानों पर लोगों की खासी भीड़ देखी गई। बच्चों ने झूले और चरखी का आनंद लेकर पर्व की खुशियों को दोगुना कर दिया। कुल मिलाकर मौनी अमावस्या का पर्व बलुआ घाट पर शांति, सुरक्षा और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ, जिसने एक बार फिर पश्चिम वाहिनी गंगा की धार्मिक महिमा को उजागर किया।
