Chandauli News: बीज शोधन से करें बीज जनित बीमारियों की रोकथाम, कृषि रक्षा इकाइयों पर 75% अनुदान पर उपलब्ध हैं रसायन.
"प्रभारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव ने बताया कि बीज शोधन की प्रक्रिया फसलों को स्वस्थ रखने का सबसे प्रभावी और किफायती उपाय है। बीजों पर उपचारित रसायन चिपकने से उन पर मौजूद रोगजनक फफूंदियां नष्ट हो जाती हैं और अंकुरण के बाद पौधों में रोग लगने की संभावना काफी कम हो जाती है।"
chandauli
7:12 PM, Jun 10, 2026
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प्रभारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव
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Story by : पूर्वांचल भास्कर डेस्क.
चंदौली। खरीफ सीजन की बुवाई से पहले किसानों के लिए राहत भरी खबर है। जिला कृषि रक्षा विभाग ने किसानों से बीज एवं भूमि शोधन कर ही बुवाई करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि शुरुआती स्तर पर बीज उपचार करने से फसलों को बीज जनित एवं भूमि जनित रोगों से बचाया जा सकता है, जिससे बाद में महंगे कीटनाशकों और दवाओं पर होने वाला खर्च भी कम होगा।
प्रभारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव ने बताया कि बीज शोधन की प्रक्रिया फसलों को स्वस्थ रखने का सबसे प्रभावी और किफायती उपाय है। बीजों पर उपचारित रसायन चिपकने से उन पर मौजूद रोगजनक फफूंदियां नष्ट हो जाती हैं और अंकुरण के बाद पौधों में रोग लगने की संभावना काफी कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि धान की फसल में मिथ्या कंडुआ, झुलसा तथा धारीदार रोग की रोकथाम के लिए किसानों को बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज में 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत अथवा 2.5 ग्राम थीरम 75 प्रतिशत की दर से बीज उपचार करना चाहिए। वहीं उड़द एवं मूंग की फसल में उकठा रोग की रोकथाम के लिए प्रति किलोग्राम बीज में 5 ग्राम ट्राइकोडरमा मिलाकर उपचारित करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा भूमि शोधन के लिए 2.5 किलोग्राम ट्राइकोडरमा को 50 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर एक सप्ताह तक छायादार स्थान पर रखने के बाद अंतिम जुताई के समय खेत में प्रयोग करना चाहिए। इससे भूमि जनित रोगों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि जिन क्षेत्रों में दीमक का प्रकोप अधिक रहता है, वहां किसान 2.5 किलोग्राम ब्यूवैरिया वैसियाना 1 प्रतिशत डब्ल्यूपी को 50 किलोग्राम गोबर की खाद में मिलाकर खेत में प्रयोग करें। यह जैविक विधि दीमक नियंत्रण में काफी कारगर साबित होती है। उन्होंने किसानों से कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप बीज एवं भूमि शोधन करने की अपील करते हुए बताया कि समस्त बीज शोधक रसायन विकास खंडों में स्थित कृषि रक्षा इकाइयों पर 75 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसान समय रहते इनका लाभ उठाकर अपनी फसलों को रोगमुक्त और अधिक उत्पादन वाली बना सकते हैं।



