Chandauli News: कर्मनाशा नदी के पुल को बंद करने पहुंचे पीडब्ल्यूडी कर्मचारी, व्यापारियों में आक्रोश.
"व्यापारी आनंद खरवार, रवि, छग्गन जी, अशोक मौर्या, नीरू, छोटू, गुड्डू आदि ने कहा कि हम सरकार के काम में बाधक नहीं बनना चाहते, लेकिन हमारी रोज़ी-रोटी का प्रश्न भी महत्वपूर्ण है। इस पुल के बंद होने से केवल व्यापारी ही नहीं बल्कि आम राहगीर और विद्यार्थी भी प्रभावित होंगे। इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं शहाबगंज कस्बे के स्कूलों और कॉलेजों में आते हैं"
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9:33 AM, Oct 15, 2025
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पीडब्ल्यूडी कर्मचारी द्वारा बंद किये गए पूल को देखते स्थानीय लोग
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Story By: रतीश कुमार, शहाबगंज.
चंदौली। शहाबगंज में कर्मनाशा नदी पर बने पुराने पुल को मंगलवार को अचानक बंद करने पहुंचे लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों का भारी विरोध हुआ। पुल को दोनों ओर से अवरुद्ध करने के प्रयासों का जैसे ही पता चला, क्षेत्र के व्यापारी आक्रोशित हो उठे और मौके पर पहुंचकर विभागीय कर्मचारियों का काम तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया। व्यापारियों का कहना है कि यह पुल न सिर्फ क्षेत्र की सामाजिक-सांस्कृतिक धड़कन से जुड़ा है बल्कि उनकी आजीविका की रीढ़ भी है। पुल को अचानक बंद करने के निर्णय से व्यापारिक गतिविधियाँ ठप्प हो जाएँगी, जिससे व्यापारियों के परिवारों के सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो जाएगा।
पिछली बाढ़ में कर्मनाशा नदी पर बने इस पुराने पुल की रेलिंग क्षतिग्रस्त हो गई है। हालांकि पुल की मूल संरचना पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है। स्थानीय लोग और व्यापारी कहते हैं कि यदि केवल रेलिंग की मरम्मत कर दी जाए तो पुल पूर्ववत उपयोग में लाया जा सकता है। स्थिति तनावपूर्ण देख प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार मिश्रा मौके पर पहुंचे और अपनी सूझबूझ से माहौल शांत किया। उन्होंने व्यापारियों से संवाद कर उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया। तभी जाकर व्यापारी मान गए और उन्होंने स्वयं दोनों ओर रास्ता बॉस-बल्ली और रस्सी से बंद कर दिया ताकि कोई अनहोनी न हो।
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व्यापारियों का कहना है कि इस पुल के जरिए ही कस्बे और आसपास के गांवों के ग्राहक उनकी दुकानों तक पहुंचते हैं। यदि पुल बंद कर दिया गया तो उनका कस्बे से सीधा जुड़ाव टूट जाएगा और इसका सीधा असर व्यापार पर पड़ेगा। स्थानीय व्यापारी आनंद खरवार, रवि, छग्गन जी, अशोक मौर्या, नीरू, छोटू, गुड्डू आदि ने कहा कि हम सरकार के काम में बाधक नहीं बनना चाहते, लेकिन हमारी रोज़ी-रोटी का प्रश्न भी महत्वपूर्ण है।
इस पुल के बंद होने से केवल व्यापारी ही नहीं बल्कि आम राहगीर और विद्यार्थी भी प्रभावित होंगे। इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं शहाबगंज कस्बे के स्कूलों और कॉलेजों में आते हैं। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों के बुजुर्गों और महिलाएं भी इस पुल का नियमित उपयोग करती हैं, जो रोज़ाना कस्बे में खरीदारी या इलाज के लिए आती हैं। स्थानीय व्यापारियों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पुराने पुल की मरम्मत कराकर उसे पुन: बहाल किया जाए।



