Chandauli News: शहीद स्मारक पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा का सपा सांसद ने किया बहिष्कार. Story By: पूर्वांचल भास्कर डेस्क.
"धानापुर के शहीद स्मारक पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा का चंदौली सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने बहिष्कार कर दिया। शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सपा सांसद ने शहीदों में भेदभाव का आरोप लगाया और पीडीए के शहीदों के अपमान का आरोप लगाते हुए बहिष्कार का पत्र भी जारी किया"
chandauli
11:37 AM, Aug 17, 2025
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शहीद स्मारक पर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते सपा सांसद वीरेंद्र सिंह
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Story By: पूर्वांचल भास्कर डेस्क.
चंदौली। धानापुर थाने पर 16 अगस्त 1942 को ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हुए आंदोलन में शहीद माँ भारती के वीर सपूतों की याद में शहीद स्मारक पर हर वर्ष शहीद दिवस का आयोजन किया जाता है। इस उपलक्ष्य में शनिवार को भी शहीद दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें बीजेपी, कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों ने शहीद स्मारक पर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किया। लेकिन चंदौली सपा सांसद द्वारा शहीद स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने के बाद श्रद्धांजलि सभा का बहिष्कार कर दिया।
शहीद स्मारक पर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते सपा सांसद वीरेंद्र सिंह और सकलडीहा सपा विधायक प्रभु नारायण सिंह यादव
16 अगस्त 1942 के दिन क्षेत्र के वीर सपूतों ने कामता प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानियों ने थाना भवन पर झंडा फहराने पहुंचे। अंग्रेज़ पुलिस द्वारा थाना भवन का मुख्य द्वार बंद कर ऐसा करने से मना कर दिया गया। इस बीच अंग्रेज़ पुलिस बंदूक निकालकर खड़े हो गए। जिससे आक्रोशित क्रांतिकारियों ने थाने की दीवार फांदकर घुसने का प्रयास किया, इस दौरान अंग्रेज़ी हुकूमत के धानापुर थानाध्यक्ष अनवारूल हक ने फायरिंग शुरू कर दी। जिसके गोली से हीरा सिंह, महंगू सिंह और रघुनाथ सिंह शहीद हो गए। उसी थाना कांड को हर साल "शहीद दिवस" के रूप में मनाया जाता है।
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सपा सांसद वीरेंद्र सिंह का पत्र
लेकिन इस बार समाजवादी पार्टी से चंदौली सांसद बीरेंद्र सिंह ने आयोजकों पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। सांसद के इस बहिष्कार से क्षेत्रीय लोगों और विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों ने सांसद पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है। सपा सांसद ने पत्र जारी कर बहिष्कार की जानकारी दी। हालांकि स्थानीय लोगों और राजनीतिक दलों के लोगों का कहना है कि व्यवस्थाओं की गड़बड़ी को ठीक न कर पाने वाले अपने पर आरोप न लगे, इससे बचने के लिए बहिष्कार का रास्ता ढूंढ निकाला, जो काफी हास्यास्पद है। ये राजनीति की जगह नहीं है, यहाँ आकर समाज का सामान करना चाहिए, भागना नहीं चाहिए।



