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Chandauli News: डीडीयू-गया रेलखंड पर कवच युक्त पहली ट्रेन बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस का सफल संचालन, 163 किमी रूट हुआ सुरक्षित.

"हाजीपुर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने बताया कि कवच प्रणाली का विस्तार एक अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और आत्मनिर्भर भारतीय रेलवे की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि रेलवे नेटवर्क के अन्य हिस्सों में भी तेजी से कवच लगाने का कार्य किया जा रहा है।"

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6:36 PM, Jun 9, 2026

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Chandauli News: डीडीयू-गया रेलखंड पर कवच युक्त पहली ट्रेन बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस का सफल संचालन, 163 किमी रूट हुआ सुरक्षित.
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बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस में लगाया गया कवच

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Story by: संदीप कुमार, बड़ा बाबू, डीडीयू नगर (चंदौली).

चंदौली। भारतीय रेलवे की सरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (डीडीयू) से गया के बीच 163 किलोमीटर रेलखंड पर स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच को सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है। सोमवार की रात फेसर-सासाराम सेक्शन पर कवच युक्त पहली ट्रेन 15137 बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस का सफल संचालन किया गया।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार डीडीयू-गया रेलखंड के तीन प्रमुख सेक्शनों में कवच वर्जन 4.0 (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) को सक्रिय किया गया है। इनमें सरमाटांर से निमियाघाट (76 किमी), डीडीयू फ्लाईओवर केबिन से भभुआ रोड (43 किमी) और सासाराम से फेसर (44 किमी) का रेलखंड शामिल है। इस प्रकार डीडीयू रेल मंडल में कुल 163 किलोमीटर रेलखंड पर कवच प्रणाली कार्यशील हो गई है। यदि पूर्व मध्य रेलवे की बात करें तो अब तक कुल 256.3 रूट किलोमीटर पर कवच प्रणाली लागू की जा चुकी है। इसमें पूर्व से संचालित मानपुर-सरमाटांर (93.3 किमी) रेलखंड भी शामिल है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि आगामी दिनों में अन्य महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर भी तेजी से कवच प्रणाली स्थापित की जाएगी।

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फेसर-सासाराम सेक्शन पर कवच युक्त पहली ट्रेन 15137 बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस फेसर स्टेशन से रात 03:02 बजे गुजरी और 03:50 बजे सासाराम पहुंची। वहीं भभुआ रोड से डीडीयू फ्लाईओवर केबिन सेक्शन में यह ट्रेन 04:39 बजे भभुआ रोड से रवाना हुई और 05:20 बजे डीडीयू के एफओसी से होकर गुजरी। इस सफल संचालन के साथ रेलवे ने सुरक्षा की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।कवच वर्जन 4.0 भारत की स्वदेशी विकसित अत्याधुनिक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा अनुमोदित किया गया है। परिचालन अनुभव और स्वतंत्र सुरक्षा आकलनों के आधार पर इसमें लगातार तकनीकी सुधार किए गए हैं। यह प्रणाली विशेष रूप से भारत के विविध, उच्च घनत्व वाले और मल्टी-लाइन रेल नेटवर्क की परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है।

कवच प्रणाली सुरक्षित ट्रेन परिचालन सुनिश्चित करने के लिए माइक्रोप्रोसेसर, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) और रेडियो संचार तकनीक का उपयोग करती है। जब एक ही ट्रैक पर निर्धारित दूरी के भीतर दूसरी ट्रेन की मौजूदगी का पता चलता है, तो यह प्रणाली लोको पायलट को तत्काल सचेत करती है। आवश्यकता पड़ने पर ऑनबोर्ड उपकरणों के माध्यम से स्वतः ब्रेक लगाकर संभावित दुर्घटना को रोक देती है। इसके लागू होने के बाद ट्रेनों की आमने-सामने की टक्कर जैसी घटनाओं की संभावना काफी हद तक समाप्त हो जाती है। इस संबंध में हाजीपुर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने बताया कि कवच प्रणाली का विस्तार एक अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और आत्मनिर्भर भारतीय रेलवे की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि रेलवे नेटवर्क के अन्य हिस्सों में भी तेजी से कवच लगाने का कार्य किया जा रहा है। कवच प्रणाली के व्यापक विस्तार से रेल संचालन की सुरक्षा और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा यात्रियों को सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलेगा।


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