Chandauli News: थमा कर्मनाशा का कहर, पुराना पुल क्षतिग्रस्त, कच्चे मकान धराशायी, रोजी-रोटी पर संकट बढ़ी मुसीबत.
"रविवार की सुबह तक कई रिहायशी मकान भरभराकर गिर पड़े। महड़ौर गांव के रामदुलार राम, मुरकौल गांव के रामअचल तथा कस्बा क्षेत्र के मंसूरी और राजकुमार के कच्चे मकान जमींदोज हो गए। गनीमत यह रही कि हादसे के वक्त मकान के अंदर कोई मौजूद नहीं था, अन्यथा कोई बड़ी जानमाल की हानि हो सकती थी। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही कटान और ज़मीन में दरारें चिंता का विषय बन गई हैं"
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9:11 PM, Oct 5, 2025
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कर्मनाशा नदी का पुराना पुल
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Story By: रतीश कुमार, शहाबगंज.
चंदौली। शहाबगंज ब्लॉक क्षेत्र की जीवनदायिनी कही जाने वाली कर्मनाशा नदी इन दिनों मुसीबत का सबब बन गई है। बीते शुक्रवार को हुई जोरदार बारिश के बाद नदी उफान पर आ गई थी, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। हालांकि अब नदी का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन लोगों की परेशानियां अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। नदी का पानी उतरने के बाद भी मिट्टी की कटान और ज़मीन धंसने के चलते कई कच्चे मकानों का गिरना जारी है।
शनिवार की रात और रविवार की सुबह तक कई रिहायशी मकान भरभराकर गिर पड़े। महड़ौर गांव के रामदुलार राम, मुरकौल गांव के रामअचल तथा कस्बा क्षेत्र के मंसूरी और राजकुमार के कच्चे मकान जमींदोज हो गए। गनीमत यह रही कि हादसे के वक्त मकान के अंदर कोई मौजूद नहीं था, अन्यथा कोई बड़ी जानमाल की हानि हो सकती थी। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही कटान और ज़मीन में दरारें चिंता का विषय बन गई हैं।
कर्मनाशा नदी पर बना पुराना पुल भी इस बार की बारिश में बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शुक्रवार को बारिश के दौरान नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया कि पानी पुल के ऊपर से बहने लगा। तेज़ बहाव के कारण पुल की रेलिंगें पूरी तरह से टूट गई हैं। अब जबकि पानी पुल के नीचे से बह रहा है, फिर भी पुल से होकर आवागमन करना खतरे से खाली नहीं है। प्रशासन ने एहतियातन पुल को आमजन के लिए बंद कर दिया है। इससे शहाबगंज कस्बा और आसपास के गांवों के लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।
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पुल के दोनों ओर बसे दुकानदारों की मुसीबतें और भी बढ़ गई हैं। आवागमन पूरी तरह बंद हो जाने से व्यापार ठप्प हो गया है। रोज़ की कमाई पर निर्भर रहने वाले इन दुकानदारों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय दुकानदार आनंद, छगन, गुड्डू, निरुद्दीन, सोनू, सब्बल आदि ने प्रशासन से जल्द से जल्द पुल की मरम्मत कराकर आवागमन बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्दी ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो उन्हें भुखमरी की स्थिति का सामना करना पड़ेगा।
बारिश और बाढ़ की वजह से हुए नुकसान की जानकारी प्रशासन को है, लेकिन अब तक कोई ठोस राहत या पुनर्वास कार्य शुरू नहीं किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब बाढ़ का पानी चढ़ा था, तब भी प्रशासन ने देरी से कदम उठाए, और अब जब पानी उतर रहा है और ज़मीन धंसने के कारण घर गिर रहे हैं, तब भी सिर्फ कागजी कार्यवाही हो रही है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि क्षतिग्रस्त मकानों के सर्वे कराकर प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत राशि दी जाए और सुरक्षित स्थानों पर उन्हें पुनर्वासित किया जाए।
कर्मनाशा नदी के किनारे बसे कई गांवों में अब भी डर का माहौल है। जिन लोगों के मकान नहीं गिरे हैं, वे भी अपने घरों को लेकर आशंकित हैं। लगातार हो रही मिट्टी की कटान से मकानों की नींव कमजोर हो रही है। कुछ लोगों ने अपने घरों को खाली कर दिया है और रिश्तेदारों या सामुदायिक भवनों में शरण ली है।



