Chandauli News : डिग्री कॉलेज में 90% छात्र फेल होने पर बवाल, ₹700 बैक पेपर शुल्क और शिक्षक न होने का आरोप.
“चंदौली के चकिया स्थित सावित्रीबाई फुले राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में को-करिकुलर विषय में करीब 90 प्रतिशत छात्रों के फेल होने पर विद्यार्थियों ने विरोध जताया। छात्रों ने शिक्षक नहीं होने और बैक पेपर के लिए ₹700 शुल्क लेने का आरोप लगाते हुए ज्ञापन सौंपा।”
chandauli
10:28 PM, Oct 13, 2026
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सावित्रीबाई फुले राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्रदर्शन करते छात्र
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Story By : पूर्वांचल भास्कर डेस्क.
चंदौली। चकिया के सावित्रीबाई फुले राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बीए प्रथम सेमेस्टर के को-करिकुलर विषय में करीब 90 प्रतिशत छात्रों के अनुत्तीर्ण होने पर विद्यार्थियों ने नाराजगी जताई। छात्रों का आरोप है कि विषय की पढ़ाई के लिए शिक्षक नहीं हैं और नियमित कक्षाएं भी नहीं चलतीं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की बैक लग रही है। बैक पेपर का फॉर्म भरने के लिए ₹700 शुल्क लिए जाने पर भी छात्रों ने सवाल उठाए।
छात्र दिनेश चौहान ने बताया कि को-करिकुलर विषय अनिवार्य है, लेकिन महाविद्यालय में इसकी पढ़ाई नहीं होती। इसके बावजूद परीक्षा आयोजित की जाती है और विद्यार्थियों को अनुत्तीर्ण कर दिया जाता है। दिनेश के मुताबिक, करीब 100 में से 90 प्रतिशत छात्रों की बैक लगने की बात सामने आई है। छात्र आलोक कुमार ने भी को-करिकुलर विषय में शिक्षक और कक्षाएं नहीं होने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को अपने स्तर से तैयारी कर परीक्षा देनी पड़ती है, फिर भी बड़ी संख्या में छात्र अनुत्तीर्ण हो रहे हैं। आलोक ने बताया कि एक बैक पेपर का फॉर्म भरने के लिए 700 रुपये शुल्क लिया जाता है। विद्यार्थियों का आरोप है कि हर साल इसी विषय में बैक लगने से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। छात्र नेता शैलेश कुमार के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने परीक्षा प्रभारी डॉ. मिथलेश कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपकर समस्या के समाधान की मांग की। छात्रों ने बताया कि वे उपजिलाधिकारी से भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक राहत नहीं मिली। छात्र नेता ने चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन किया जाएगा।
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परीक्षा प्रभारी डॉ. मिथलेश कुमार सिंह ने स्वीकार किया कि करीब 90 प्रतिशत छात्र अनुत्तीर्ण हुए हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय को लिखित शिकायत भेजी गई है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने इस समस्या के अन्य महाविद्यालयों में भी सामने आने की बात कही है और परीक्षा काउंसिल की बैठक में विचार करने का आश्वासन दिया है। प्राचार्या के अवकाश पर होने की भी जानकारी दी गई।


