Chandauli News: आरोपियों के परिजनों ने क्यों उठाया सीबीआई जांच की मांग, मुख्यमंत्री पोर्टल, आईजी, गृहमंत्री को मेल भेज लगाई न्याय की गुहार.
"परिजनों का कहना है कि पुलिस ने मनोज और ओमप्रकाश को पूछताछ के नाम पर बुलाया और शाम तक छोड़ने का भरोसा दिलाकर 5 दिन तक रोके रखा। अंत में अचानक उन्हें हत्या की साजिश में शामिल दिखा दिया। न तो परिवार को स्पष्ट जानकारी दी गई, न किसी कड़ी के बारे में बताया गया। इसी वजह से परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग उठाई है"
chandauli
12:15 PM, Nov 27, 2025
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न्याय की गुहार लगाते परिजन
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Story By: संदीप कुमार, बड़े बाबू, डीडीयू नगर.
चंदौली। दवा व्यवसाई रोहिताश पाल हत्याकांड में पुलिस के खुलासे के बाद भी सवालों का दौर जारी है। पुलिस ने हत्या की साजिश रचने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। खुलासा होते ही नगर में तनाव कुछ कम जरूर हुआ, लेकिन इसके बावजूद लोगों के मन में कई नए सवाल जन्म लेने लगे हैं। हर कोई रोहिताश के लिए न्याय की मांग कर रहा है, वहीं पुलिस की थ्योरी को लेकर गहरी शंकाएं भी उठ रही हैं।
परिजनों ने क्यों उठाई सीबीआई जांच की मांग?
गिरफ्तार आरोपित मनोज की बेटी निधि ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि “मेरे पिता और ओमप्रकाश को गलत तरीके से साजिशकर्ता बना दिया गया है। पुलिस शासन-सत्ता के दबाव में काम कर रही है। मेरे पिता हार्ट पेशेंट हैं, उनकी सेहत भी खतरे में पड़ गई है।” निधि ने मुख्यमंत्री पोर्टल, चंदौली एसपी, आईजी और गृह मंत्री तक को मेल भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही 112 नंबर पर भी सूचना देने का दावा किया है। आरोप है कि इसके बाद पुलिस झल्ला गई और परिजनों को मुग़लसराय कोतवाली गेट से बाहर भगा दिया तथा धमकाया भी।
पुलिस की कहानी पर परिजनों ने उठाए सवाल
परिजनों का कहना है कि पुलिस ने मनोज और ओमप्रकाश को पूछताछ के नाम पर बुलाया और शाम तक छोड़ने का भरोसा दिलाकर 5 दिन तक रोके रखा। अंत में अचानक उन्हें हत्या की साजिश में शामिल दिखा दिया। न तो परिवार को स्पष्ट जानकारी दी गई, न किसी कड़ी के बारे में बताया गया। इसी वजह से परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग उठाई है।
नगर में चर्चाओं का बाज़ार गर्म
गल्ला मंडी, नई सट्टी कालीमहाल, चकिया–चंदौली तिराहा, परमार कटरा, रेलवे स्टेशन, चट्टी-चौराहों से लेकर चाय की दुकानों तक एक ही चर्चा, क्या सच में ये लोग ऐसी वारदात करा सकते हैं? लोग पुलिस की थ्योरी को पचा नहीं पा रहे हैं। सवाल यह भी है कि यदि पुलिस ने साजिशकर्ताओं और शूटर के बीच की कड़ी खोज ली है, तो शूटर अब तक गिरफ्त से बाहर क्यों है? जनमानस में उठ रहे सवाल पुलिस की पूरी कहानी को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।
समाज में बढ़ती असमंजस व अविश्वास की स्थिति
डीडीयू नगर में यह भी चर्चा है कि व्यापारी व समाजसेवी होने के नाते आरोपितों का मृतक परिवार से बातचीत या पंचायत में शामिल होना कोई असामान्य बात नहीं है। ऐसे में सवाल है कि पुलिस ने किस आधार पर साजिश का संबंध जोड़ा? कौन से पुख्ता साक्ष्य मिले जिनसे यह कड़ी स्थापित हुई? क्या मात्र बयानबाजी और लिंकिंग पर कार्रवाई की गई?
न्याय की बेचैनी दोनों ओर
जहाँ रोहिताश पाल को न्याय दिलाने को नगर का हर व्यक्ति व्याकुल है, वहीं गिरफ्त में लिए गए व्यापारी परिवारों के लोग भी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। सवालों के बीच अब पूरा शहर दो ही बातों की प्रतीक्षा में है। हत्या के असली शूटर की गिरफ्तारी और साजिश की कड़ी को लेकर पुलिस का स्पष्ट और ठोस जवाब। मामला लगातार गर्माता जा रहा है, और अब निगाहें प्रशासन तथा उच्च स्तर की जांच पर टिकी हैं।
