Sonbhadra News: झंडेश्वर महादेव मंदिर में 24 घंटे का अखंड हरिकीर्तन संपन्न, भंडारे में उमड़े हजारों श्रद्धालु.
बीजपुर के मिटीहिनी (खैरी) स्थित झंडेश्वर महादेव मंदिर में 24 घंटे का अखंड हरिकीर्तन मंगलवार को विधिवत संपन्न हुआ। हरिकीर्तन के समापन के बाद मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। दोपहर में देवी जागरण के दौरान कलाकारों ने भजनों की प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया।
sonbhadra
6:20 PM, Aug 25, 2026
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झंडेश्वर महादेव मंदिर में अखंड हरिकीर्तन के समापन पर आयोजित भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया, वहीं भक्तिमय भजनों से मंदिर परिसर गूंज उठा।
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Story By: नीरज गुप्ता, बीजपुर।
सोनभद्र।
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बीजपुर थाना क्षेत्र स्थित मिटीहिनी (खैरी) में झंडेश्वर महादेव मंदिर में 24 घंटे का अखंड हरिकीर्तन मंगलवार को संपन्न हो गया। सावन के अंतिम सोमवार को शुरू हुए इस आयोजन के बाद मंदिर परिसर में भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। यह मंदिर खैरी की सुंदर वादियों में पहाड़ की चोटी पर स्थित है और अपनी प्राकृतिक छटा के लिए श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र है। मंदिर के संस्थापक खैरी निवासी मनोज कुमार वैश्य ने अपना जीवन मंदिर की सेवा और धार्मिक आयोजनों के लिए समर्पित किया है। प्रत्येक वर्ष सावन माह के अंतिम सोमवार को मंदिर परिसर में 24 घंटे के अखंड हरिकीर्तन का आयोजन किया जाता है। इसी परंपरा के तहत इस वर्ष भी सावन के अंतिम सोमवार को हरिकीर्तन का शुभारंभ हुआ, जिसका मंगलवार को विधिवत समापन किया गया। हरिकीर्तन के समापन के उपरांत मंदिर समिति ने परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया। इसमें क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया। मंगलवार दोपहर देवी जागरण का भी आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों ने भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। धार्मिक आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पहाड़ की चोटी पर स्थित इस मंदिर में दर्शन-पूजन और भंडारे का प्रसाद ग्रहण करने के लिए दूर-दराज से भी भक्त पहुंचे। कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर के संस्थापक मनोज कुमार वैश्य, मंशा राम, सुरेश कुमार, राजू वैश्य, चंद्र कुमार, दिनेश कुमार, राम लाल सहित मंदिर समिति के सदस्यों और स्थानीय श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
