Sonbhadra News: 5-5 साल की कठोर कैद: लाठी-डंडे से मारपीट के 12 साल पुराने मामले में दो दोषी दोषसिद्ध.
सोनभद्र में साढ़े 12 वर्ष पुराने मारपीट के मामले में अदालत ने संतोष मौर्य और सोनू मौर्य को 5-5 वर्ष की कठोर कैद की सजा सुनाई। दोनों दोषियों पर 3-3 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है, न देने पर 3-3 माह की अतिरिक्त कैद होगी। आने-जाने के विवाद में लाठी-डंडे से मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में सत्र न्यायालय ने दोषसिद्धि की है।
sonbhadra
7:29 PM, Sep 24, 2026
Share:


सोनभद्र अदालत के फैसले को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर।
Daily ख़बरों के लिए फ़ॉलो करें
Story By: अनुज जायसवाल।
सोनभद्र।
विज्ञापन
आने-जाने के रास्ते को लेकर करीब साढ़े 12 वर्ष पूर्व लाठी-डंडे से मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में सत्र न्यायालय ने दो दोषियों को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर तीन-तीन हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर तीन-तीन माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।मामले की सुनवाई गुरुवार को सत्र न्यायाधीश राम सुलीन सिंह की अदालत में हुई। अदालत ने साक्ष्यों, गवाहों के बयान और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद संतोष मौर्य और सोनू मौर्य को दोषसिद्ध पाया और सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष के अनुसार रामसूरत मौर्य निवासी मधुपुर (कोइलहिया), थाना रॉबर्ट्सगंज ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि 25 जनवरी 2014 को वह संतोष मौर्य और सोनू मौर्य के घर के सामने से गुजर रहा था। इसी दौरान आने-जाने के रास्ते को लेकर दोनों ने उसके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। रामसूरत के यह कहने पर कि गांव में आने-जाने के लिए एक ही रास्ता है, दोनों ने लाठी-डंडों से उसकी पिटाई कर दी। मारपीट में रामसूरत को कान, आंख के पास और सीने में गंभीर चोटें आई थीं। ग्रामीणों की मदद से उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल लोढ़ी ले जाया गया। पुलिस ने प्रारंभ में एनसीआर दर्ज की थी। इसके बाद 27 जनवरी को जिला अस्पताल में रामसूरत का चिकित्सकीय परीक्षण और मेडिकल कराया गया। बाद में न्यायालय के आदेश पर मामले की विवेचना हुई। विवेचना के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर गंभीर चोट के आधार पर मुकदमे में धारा 308 आईपीसी की बढ़ोतरी की गई और संतोष मौर्य व सोनू मौर्य के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अभियुक्तों के अधिवक्ता ने इसे पहला अपराध बताते हुए कम सजा देने की मांग की। वहीं जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ज्ञानेंद्र शरण रॉय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम दंड दिए जाने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषसिद्ध करते हुए पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास और तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर तीन-तीन माह की अतिरिक्त कैद होगी। अदालत ने जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समाहित करने का भी आदेश दिया।



