Sonbhadra News: पुश्तैनी जमीन बचाने को 53 परिवारों की गुहार, पूर्व प्रधान पर जमीन बेचने का आरोप.
बभनी के पोखरा गांव में 53 परिवारों ने पुश्तैनी जमीन बचाने के लिए जिलाधिकारी से उच्चस्तरीय जांच की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व ग्राम प्रधान ने सर्वे अभिलेखों में अपना नाम दर्ज कराकर कब्जे वाली जमीन दूसरे लोगों को बेच दी। विवादित जमीन का दाखिल-खारिज रोकने और अभिलेखों की जांच कर वास्तविक काबिज परिवारों के नाम दर्ज करने की मांग की गई।
sonbhadra
7:54 PM, Aug 20, 2026
Share:


पुश्तैनी जमीन बचाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते ग्रामीण और जिलाधिकारी को ज्ञापन देने पहुंचे ग्रामीण।
Daily ख़बरों के लिए फ़ॉलो करें
Story By: चंद्रशेखर पाण्डेय, बभनी।
सोनभद्र।
विज्ञापन
विकास खंड बभनी के पोखरा गांव में 53 परिवारों ने अपनी पुश्तैनी जमीन बचाने के लिए जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व ग्राम प्रधान ने सर्वे अभिलेखों में अपना नाम दर्ज कराकर उनकी कब्जे वाली जमीन को दूसरे लोगों के हाथ बेच दिया। ग्रामीणों ने जमीन का दाखिल-खारिज रोकने की मांग करते हुए गांव में संभावित विवाद की आशंका भी जताई है। प्रार्थना पत्र देने वालों में जगशाय, शिवनाथ, सीता और देवनाथ समेत 53 परिवारों के लोग शामिल हैं। ग्रामीणों के मुताबिक उनका गांव वर्ष 1990-95 के पूर्व सर्वे में शामिल था। उस समय राजेंद्र प्रसाद पुत्र हरी ग्राम प्रधान थे। आरोप है कि सर्वे अधिकारियों की मिलीभगत से आराजी संख्या 3412 ख में 1.0625 हेक्टेयर और आराजी संख्या 3413 ख में 1.2650 हेक्टेयर भूमि पर राजेंद्र प्रसाद का नाम दर्ज कर दिया गया, जबकि उक्त भूमि पर ग्रामीण परिवार पीढ़ियों से काबिज चले आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में 60 प्रतिशत से अधिक नाम गलत पाए जाने के बाद पुराना सर्वे निरस्त कर दिया गया था और नए सिरे से सर्वे का आदेश हुआ। नया सर्वे अभी भी प्रक्रिया में बताया जा रहा है। इसी बीच वर्ष 2016 से पूर्व ग्राम प्रधान राजेंद्र प्रसाद द्वारा ग्रामीणों की कब्जे वाली जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किए जाने का आरोप है। ग्रामीणों के अनुसार उन्हें यह कहते हुए जमीन खाली करने की धमकी दी गई कि भूमि अभिलेखों में उनके नाम दर्ज है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री समेत संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर शिकायत की थी। इसके बाद 24 सितंबर 2016 को सहायक अभिलेख अधिकारी, ओबरा के न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया गया, जो अभी विचाराधीन बताया है। वहीं 24 जुलाई 2017 को उपजिलाधिकारी स्तर से की गई जांच में भी ग्रामीणों का जमीन पर कब्जा पाया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि राजेंद्र प्रसाद का न तो कभी जोत कोड था और न ही संबंधित जमीन पर उनका कब्जा रहा। इसके बावजूद 29 मई 2020 को कागजी अभिलेखों के आधार पर आराजी संख्या 3412 ख और 3413 ख की जमीन रामधन अग्रवाल और अजय कुमार सिंह निवासी बीजपुर के हाथ बेच दी गई। ग्रामीणों के मुताबिक बिक्री के बाद भी जमीन का दाखिल-खारिज अभी तक नहीं हुआ है।ग्रामीणों ने बताया कि विवादित जमीन पर महुआ, सागौन और सेमिया सहित करीब 34 बड़े पेड़ तथा सैकड़ों छोटे पौधे मौजूद हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते मामले का समाधान नहीं किया गया तो जमीन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। 53 परिवारों ने जिलाधिकारी से आराजी संख्या 3412 ख समेत संबंधित भूमि की उच्चस्तरीय जांच कराने, विवादित जमीन के दाखिल-खारिज पर रोक लगाने तथा अभिलेखों की जांच कर वास्तविक काबिज परिवारों के नाम दर्ज कराने की मांग की है।



