Sonbhadra News: पालकी में निकली अनोखी बारात, परंपरा को जीवित देख लोग बनाने लगे वीडियो, वीडियो हुआ वायरल.
आधुनिक दौर में जहां शादियों में लग्जरी गाड़ियों और हाईटेक व्यवस्थाओं का चलन तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दुद्धी ब्लॉक के हरपुरा गांव में एक अनोखी और पारंपरिक बारात ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। यहां दूल्हा कार या घोड़ी के बजाय सजी-धजी पालकी में सवार होकर दुल्हन लेने पहुंचा, जिसे देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
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8:17 PM, Apr 22, 2026
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दूल्हा लग्जरी गाड़ी की बजाय पालकी में सवार होकर दुल्हन लेने पहुंचा।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
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आधुनिक दौर में जहां शादियों में लग्जरी गाड़ियों और हाईटेक व्यवस्थाओं का चलन तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दुद्धी ब्लॉक के हरपुरा गांव में एक अनोखी और पारंपरिक बारात ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। यहां दूल्हा कार या घोड़ी के बजाय सजी-धजी पालकी में सवार होकर दुल्हन लेने पहुंचा, जिसे देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हरपुरा गांव निवासी मुन्द्रिका गुप्ता के पुत्र मनोज गुप्ता ने अपनी शादी में पुरानी परंपराओं को जीवित रखने का निर्णय लिया। उन्होंने आकर्षक ढंग से सजाई गई पालकी में बैठकर बारात निकाली। जैसे ही पालकी गांव से निकली, लोग जहां थे वहीं रुक गए और इस अनोखे दृश्य को देखने लगे। कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से इस यादगार पल को कैद किया और सोशल मीडिया पर भी साझा किया। यह बारात हरपुरा से निकलकर झारखंड के टड़हे गांव पहुंची, जहां मनोज गुप्ता का विवाह वीरेंद्र साव की पुत्री तारामणी के साथ संपन्न हुआ। बारात के गांव पहुंचते ही स्थानीय लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए और पालकी में बैठे दूल्हे को देखने के लिए उत्सुक नजर आए। शादी के बाद जब दूल्हा-दुल्हन पालकी में सवार होकर वापस हरपुरा लौटे, तो यह दृश्य और भी खास बन गया। गांव के चौराहों और गलियों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। पालकी में बैठी दुल्हन को देखने के लिए लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और इस परंपरागत दृश्य को अपने कैमरों में कैद करने लगे। ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों बाद इस तरह की पारंपरिक पालकी बारात देखने को मिली है। जहां एक ओर आज की शादियां आधुनिकता की ओर बढ़ रही हैं, वहीं इस पहल ने लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं की याद दिला दी। लोगों ने दूल्हा-दुल्हन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह परंपराओं को जीवित रखने का एक सराहनीय प्रयास है। इस अनोखी बारात की चर्चा पूरे क्षेत्र में बनी हुई है और यह उदाहरण बन गया है कि आधुनिकता के बीच भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रहना संभव है।
