Sonbhadra News: आदिवासी, दलित समेत अन्य किसान आवारा पशुओं से परेशान, ओबरा प्रशासन से लगाई गुहार.
ओबरा क्षेत्र में बड़ी संख्या में खेती करने वाले किसान आवारा पशुओं से परेशान है जो उनकी फसलों को नष्ट कर दे रहे हैं किसानों ने ओबरा प्रशासन से कानूनी प्रक्रिया अपनाकर समाधान निकाले जाने की गुहार लगाई है।
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1:51 PM, Aug 11, 2025
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खेतों में फसलों को चरती आवारा पशु।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
पिछले वर्ष की तरह इस बार भी ओबरा क्षेत्र के आदिवासी दलित समेत अन्य किसान आवारा पशुओं से परेशान हैं। लाख जतन के बाद भी आवारा पशु उनकी फसलों को चर रहे हैं। इससे आदिवासी, दलित और अन्य समुदायों के किसान त्रस्त हैं। किसानों ने कहा दिन में रखवाली करने से आवारा पशु कम आते है लेकिन जब रात में नींद लग जाती है तो बड़ी संख्या में पशु आकर हमारी फसलों को नष्ट कर देते है।
ओबरा प्रशासन से मांग करते किसान
परेशान किसान तहसील ओबरा के एसडीएम और थाना प्रभारी से अनुरोध कर रहे हैं कि कोई कानूनी प्रक्रिया अपनाकर समाधान निकाला जाए। किसानों का आरोप है बिल्ली मारकुंडी टोला खैरटिया गांव में एक गौशाला है, जहां ओबरा नगर और बाहरी क्षेत्रों के पशुओं को लाकर छोड़ा जाता है।
ओबरा नगर और बाहरी क्षेत्रों के पशुओं को लाकर छोड़ने से बढ़ी समस्या।
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लेकिन गांव के पशुओं को वहां नहीं रखा जाता। स्थानीय किसान अमरनाथ उजाला ने बताया कि वे यहां के आदिवासी और मूल निवासी हैं। वे पीढ़ियों से किसानी करते आ रहे हैं। पिछले चार-पांच सालों से नगर और आसपास के क्षेत्रों से छोड़े गए 40 से 50 की संख्या में आवारा पशु उनकी फसलों को चर रहे हैं। पशुओं ने अरहर, मकई, उरद, तिल्ली, बेतरी और धान जैसी फसलें बर्बाद कर दी हैं।
किसान अमरनाथ उजाला
किसानों की परेशानी यह है कि पशु दिन-रात खेतों में घूमते रहते हैं। किसानों ने पिछले साल भी इस समस्या के बारे में ओबरा प्रशासन को सूचित किया था। इस बार भी वे जिलाधिकारी, तहसील ओबरा के एसडीएम और थाना प्रभारी से अनुरोध कर रहे हैं कि कोई कानूनी प्रक्रिया अपनाकर समाधान निकाला जाए।
स्थानीय किसान फूलचंद
अगर पशुओं पर लगाम नहीं लगता है तो हम सब किसान उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदार सिर्फ शासन-प्रशासन होगी। बता दे कि बिल्ली मारकुंडी टोला खैरटिया गांव में एक गौशाला है, जहां ओबरा नगर और बाहरी क्षेत्रों के पशुओं को लाकर छोड़ा जाता है। लेकिन गांव के पशुओं को वहां नहीं रखा जाता। इसके अलावा, बरसात के कारण खेतों में जुताई और बुवाई का काम भी प्रभावित हुआ है।



