मुख्य खबरें/न्यूज़/sonbhadra news after 7 years the innocent got justice the accused had looted the life of the innocent by coaxing the court sentenced him to 10 years

Sonbhadra News: 7 साल बाद मिला मासूम को न्याय, अभियुक्तों ने बहला-फुसलाकर लूटी थी मासूम की जिंदगी, अदालत ने सुनाई 10 साल की सजा.

विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ओमकार शुक्ला की अदालत ने वर्ष 2019 में 17 वर्षीय नाबालिग किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में मुख्य अभियुक्त दिनेश कुमार को 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹50 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई है। सह-अभियुक्त सूर्य नारायण को अपहरण के मामले में 5 वर्ष के कारावास व ₹10 हजार अर्थदंड से दंडित किया गया।

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7:55 PM, Jul 21, 2026

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Sonbhadra News: 7 साल बाद मिला मासूम को न्याय, अभियुक्तों ने बहला-फुसलाकर लूटी थी मासूम की जिंदगी, अदालत ने सुनाई 10 साल की सजा.
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नाबालिग की अस्मिता के दोषियों पर अदालत का सख्त प्रहार, मुख्य आरोपी को 10 साल की जेल

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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरो सोनभद्र।

विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट, ओमकार शुक्ला के न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 17 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दो अभियुक्तों को दोषी ठहराया है। मुख्य अभियुक्त दिनेश कुमार को 10 वर्ष के कठोर कारावास और कुल ₹50,000 के अर्थदंड से दंडित किया गया है। अभियोजन के अनुसार, यह घटना 25 जुलाई 2019 को हुई थी। अभियुक्त दिनेश कुमार, जो पहले से विवाहित था, ने अपने सह-अभियुक्त सूर्यनारायण के साथ मिलकर लगभग 17 वर्षीय नाबालिग पीड़िता को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। आरोप था कि दिनेश कुमार ने पीड़िता को अपनी हिरासत में रखकर उसकी इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी होने पर पीड़िता की माता ने थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई। विवेचना के दौरान पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया, उसका न्यायिक बयान दर्ज किया गया और विद्यालयीय अभिलेखों से उसकी नाबालिग होने की पुष्टि हुई। विवेचना पूरी होने पर दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया। विचारण के दौरान, अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसकी माता, चिकित्सक, विवेचक, एफआईआर लेखक और विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सहित कई गवाहों के बयान तथा जन्म प्रमाण पत्र, विद्यालयीय अभिलेख, चिकित्सीय परीक्षण रिपोर्ट और धारा 164 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत दर्ज बयान जैसे दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। न्यायालय ने इन साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन के मामले को संदेह से परे सिद्ध पाया। न्यायालय ने मुख्य अभियुक्त दिनेश कुमार (लगभग 30 वर्ष) को भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4 के तहत दोषी ठहराया। उसे धारा 363 में 5 वर्ष का कारावास और ₹10,000 का अर्थदंड, धारा 366 में 7 वर्ष का कारावास और ₹10,000 का अर्थदंड, तथा धारा 376 में 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹30,000 के अर्थदंड से दंडित किया गया। सभी सजाएँ साथ-साथ चलेंगी। सह-अभियुक्त सूर्यनारायण को भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के अपराध में दोषी सिद्ध कर 5 वर्ष के कारावास और ₹10,000 के अर्थदंड से दंडित किया गया। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि अभियुक्तों से वसूल की गई अर्थदंड की राशि नियमानुसार पीड़िता के चिकित्सीय उपचार, मानसिक पुनर्वास और अन्य सहायता हेतु उपलब्ध कराई जाएगी। इस मुकदमे में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक दिनेश प्रसाद अग्रहरी और विशेष लोक अभियोजक नीरज कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और विधिक तर्कों के आधार पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट, सोनभद्र ने दोनों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए यह दंडादेश पारित किया।


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