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मुख्य खबरें/न्यूज़/sonbhadra news allegations of illegal mining and fake investigation report in cati markundi mines environmental activist warns of going to court

Sonbhadra News: बिल्ली-मारकुंडी की खदानों में अवैध खनन और फर्जी जांच रिपोर्ट का आरोप, पर्यावरण कार्यकर्ता ने दी कोर्ट जाने की चेतावनी.

सोनभद्र के बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में संचालित कई ई-टेंडर खदानों को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता निर्भय चौधरी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में अवैध खनन, अत्यधिक विस्फोटकों का प्रयोग, भूजल दोहन और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद खनन विभाग और डीजीएमएस द्वारा निष्पक्ष जांच नहीं की जाती।

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5:12 PM, Jun 4, 2026

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Sonbhadra News: बिल्ली-मारकुंडी की खदानों में अवैध खनन और फर्जी जांच रिपोर्ट का आरोप, पर्यावरण कार्यकर्ता ने दी कोर्ट जाने की चेतावनी.
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बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र के कई खदानों पर अवैध खनन के गंभीर आरोप।

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Story: आर. एन. पाण्डेय, ओबरा तहसील।

सोनभद्र।

जिले में अवैध खनन और खनन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होने से सरकार की छवि पर भी असर पड़ रहा है। बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र, जो 15 नवम्बर 2025 में हुए हादसों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है, उस क्षेत्र की अधिकतर खदानों में एक बार फिर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। लोगों को उम्मीद थी कि खनन निदेशक और विभिन्न विभागों के निरीक्षण और निर्देशों के बाद खनन गतिविधियां नियमों के अनुसार संचालित होंगी, लेकिन हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।

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आईजीआरएस सहित विभिन्न माध्यमों से अवैध खनन, मानकों के विपरीत ब्लास्टिंग, पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन, भूजल दोहन और अन्य अनियमितताओं की शिकायतें लगातार की जा रही हैं। आरोप है कि कई मामलों में बिना मौके का निरीक्षण किये खान निरीक्षक अतुल दुबे द्वारा ही रिपोर्ट तैयार कर शिकायतों का निस्तारण कर दिया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन क्षेत्र किसी जोखिम भरे क्षेत्र से कम नहीं है, जहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

खनन विभाग और डीजीएमएस की कार्यशैली पर उठाए सवाल:

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पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता निर्भय चौधरी ने बिल्ली-मारकुंडी क्षेत्र में संचालित कई ई-टेंडर खदानों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने खनन विभाग तथा डीजीएमएस (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है, लेकिन शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही। निर्भय चौधरी का कहना है कि उन्होंने साई राम इंटरप्राइजेज, बालाजी, शिव स्टोन, श्री स्टोन, राधे-राधे, मंगला प्रसाद समेत कई खदानों के संबंध में कई बार संबंधित विभागों को शिकायतें भेजी हैं। इसके बावजूद शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय कागजी कार्रवाई के माध्यम से मामलों का निस्तारण कर दिया जाता है।

भूजल दोहन और पर्यावरणीय नुकसान का आरोप:

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निर्भय चौधरी ने आरोप लगाया कि कई खदानों के पास जल प्रबंधन से संबंधित आवश्यक स्वीकृतियां तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर विस्फोटकों का उपयोग और भूजल का दोहन किया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार जहां एक ओर लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर खनन क्षेत्रों में पानी का अत्यधिक उपयोग और निकासी जारी है। उन्होंने कहा कि इससे पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है तथा वन्य जीवों और स्थानीय जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। लगातार हो रही ब्लास्टिंग और उड़ती धूल के कारण आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।

प्रतिदिन बड़े पैमाने पर हो रही खनिज निकासी:

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पर्यावरण कार्यकर्ता का दावा है कि संबंधित खदानों से प्रतिदिन सैकड़ों से लेकर हजारों टिप्परों के माध्यम से बोल्डर और अन्य खनिजों का परिवहन किया जा रहा है। उनका आरोप है कि खनन कार्य स्वीकृत माइनिंग प्लान और निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं हो रहा है। यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो अनेक गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।

शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप:

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निर्भय चौधरी ने कहा कि जब शिकायतों की प्रगति जानने के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया जाता है तो कई बार फोन तक नहीं उठाया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में चार-चार महीने तक जांच नहीं होती और बाद में औपचारिक रिपोर्ट लगाकर शिकायतों का निस्तारण दिखा दिया जाता है। उन्होंने विशेष रूप से आईजीआरएस पोर्टल पर प्रस्तुत की जाने वाली जांच रिपोर्टों की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए हैं।

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मुख्यमंत्री से नहीं, स्थानीय अधिकारियों से है शिकायत:

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मुख्यमंत्री की भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में निर्भय चौधरी ने कहा कि उनकी शिकायत मुख्यमंत्री से नहीं बल्कि स्थानीय स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों की कार्यशैली से है। उनका कहना है कि यदि जमीनी हकीकत को सही रूप में शासन तक नहीं पहुंचाया जाएगा और कागजों में सब कुछ व्यवस्थित दिखाया जाएगा तो उच्च स्तर पर बैठे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को वास्तविक स्थिति की जानकारी कैसे मिलेगी।

सुरक्षा मानकों के पालन पर भी उठे सवाल:

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निर्भय चौधरी ने खदानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई हैं। उनके अनुसार कई खदानों में नियमानुसार सीढ़ीनुमा संरचना यानी ब्रेंच का निर्माण नहीं किया गया है, जबकि यह खनन सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि कई खदानें आवश्यकता से अधिक गहरी हो चुकी हैं और सीमित क्षेत्रफल में संचालित होने के कारण वहां सुरक्षा मानकों का पालन करना कठिन हो गया है। उनका कहना है कि ऐसे में यह जांच का विषय है कि इन खदानों को संचालन की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई और सुरक्षा मानकों की निगरानी किस प्रकार की जा रही है।

कार्रवाई न होने पर न्यायालय जाने की चेतावनी:

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निर्भय चौधरी ने कहा कि यदि उनकी शिकायतों पर शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और अवैध खनन से जुड़े मामलों को लेकर जनहित याचिका दाखिल करने की भी बात कही। साथ ही उन्होंने नवागत जिलाधिकारी से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराने की योजना बताई। उन्होंने मांग की कि खदानों में विस्फोटकों के उपयोग, भूजल दोहन, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, सुरक्षा मानकों तथा खनिज परिवहन व्यवस्था की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।

विभागों से सार्वजनिक जवाब मांगे:

निर्भय चौधरी ने खनन विभाग और डीजीएमएस से कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने पूछा है कि खदानों में सुरक्षा मानकों को लेकर निर्धारित नियम क्या हैं और क्या ये नियम शिकायतकर्ता व आम लोगों के लिए उपलब्ध हैं।

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इसके अलावा उन्होंने खदानों की नियमित जांच की समय-सीमा, अवैध खनन पाए जाने पर कार्रवाई की प्रक्रिया, आर्थिक दंड के प्रावधान, खनन एवं परिवहन परमिट जारी करने की व्यवस्था, खनन कार्य के निर्धारित समय, रात्रिकालीन परिवहन की अनुमति, श्रमिकों की सुरक्षा और बीमा व्यवस्था, भूजल उपयोग के नियम, विस्फोटकों के प्रयोग की निगरानी तथा डीजीएमएस और खनन विभाग की संयुक्त जांच रिपोर्टों को शिकायतकर्ता को सार्वजनिक करने जैसे मुद्दों पर भी स्पष्ट जानकारी मांगी है। पर्यावरण कार्यकर्ता का कहना है कि इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होने से खनन गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम लोगों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।

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वही खनन अधिकारी से जब अवैध खनन के मुद्दों पर आधिकारिक बयान के लिए कहा गया तो उन्होंने बयान देने से हमेशा की तरह साफ इंकार कर दिया और पत्रकार से ही कह डाला की आप लिखित में शिकायत दीजिये, तब जाकर इस विषय में हम सोचेंगे।


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