Sonbhadra News: कॉलिनडूबा पेट्रोल पंप पर कम तेल, बिना बिल और मीटर गड़बड़ी का आरोप, कार्रवाई की मांग तेज.
विंढमगंज थाना क्षेत्र के कॉलिनडूबा स्थित पेट्रोल पंप पर लगातार गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। एक ग्राहक ने बताया कि मीटर पहले से 160 रुपये दिखा रहा था, फिर भी कम पेट्रोल देकर 200 तक पहुंचा दिया गया। अन्य लोगों ने भी कम तेल और बिना बिल देने की शिकायत दोहराई। ग्रामीणों ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए “जेब पर डकैती” करार दिया।
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7:31 PM, Apr 22, 2026
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ग्रामीणों ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए “जेब पर डकैती” करार दिया।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
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दुद्धी विकास खंड के विंढमगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत कॉलिनडूबा गांव स्थित एक पेट्रोल पंप पर ग्राहकों के साथ कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने आरोप लगाया है कि पेट्रोल पंप पर लगातार कम तेल दिया जा रहा है, मीटर में गड़बड़ी की जा रही है और ग्राहकों को बिल भी नहीं दिया जाता, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, हाल ही में एक ग्राहक पेट्रोल लेने पहुंचा तो मशीन का मीटर पहले से ही 160 रुपये दर्शा रहा था। इसके बावजूद कर्मचारी ने मात्र 40 रुपये का पेट्रोल भरकर मीटर को 200 रुपये तक पहुंचा दिया और ग्राहक से 100 रुपये का पेट्रोल देने की बात कही। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने भी इसी तरह की शिकायतें सामने रखीं। कई ग्राहकों का कहना है कि पेट्रोल पंप पर यह गड़बड़ी लंबे समय से चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ग्राहकों को न तो पूरा पेट्रोल दिया जाता है और न ही उन्हें खरीद का बिल उपलब्ध कराया जाता है। यह न केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता के साथ सीधा आर्थिक छल भी है। लोगों ने इसे “जेब पर डकैती” बताते हुए संबंधित विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों और वाहन चालकों ने जिला प्रशासन तथा आपूर्ति विभाग से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। वहीं, इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी इस गंभीर शिकायत को कितनी प्राथमिकता देते हैं और उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
