Sonbhadra News: बर्दिया की खदान में मानक से अधिक खनन और सुरक्षित वन क्षेत्र का व्यावसायिक उपयोग का आरोप, जांच की मांग.
ओबरा तहसील क्षेत्र के बर्दिया इलाके में संचालित अली स्टोन खदान पर मानक से अधिक खनन और विस्फोटक के अंधाधुंध इस्तेमाल का आरोप लगा है। प्राकृतिक संरक्षण के लिए कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ता निर्भय चौधरी ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। निर्भय चौधरी का आरोप है कि खदान संचालक निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक बोल्डर का खनन कर रहे हैं।
sonbhadra
8:42 PM, Feb 24, 2026
Share:


अधिक लाभ कमाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा मानक के विपरीत खनन- निर्भय चौधरी.
Daily ख़बरों के लिए फ़ॉलो करें
Story By: अनुज जायसवाल, सोनभद्र।
सोनभद्र।
जनपद के ओबरा तहसील क्षेत्र के बर्दिया इलाके में संचालित अली स्टोन खदान पर मानक से अधिक खनन और विस्फोटक के अंधाधुंध इस्तेमाल का आरोप लगा है। प्राकृतिक संरक्षण के लिए कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ता निर्भय चौधरी ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। निर्भय चौधरी का आरोप है कि खदान संचालक निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक बोल्डर का खनन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खनन पट्टों के लिए प्रतिवर्ष और प्रतिदिन के हिसाब से खनन की सीमा तय होती है, लेकिन पट्टाधारक नियमों की अनदेखी कर अवैध तरीके से बड़े पैमाने पर खनन कर रहे हैं। निर्भय चौधरी के अनुसार संबंधित खदान से महज कुछ दूरी पर एक विद्यालय स्थित है। विस्फोट के दौरान बच्चे दहशत में रहते हैं। उनका कहना है कि मानक से अधिक विस्फोटक प्रयोग से न केवल बच्चों की सुरक्षा खतरे में है, बल्कि क्षेत्र में धूल और प्रदूषण भी बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि खदान से निकलने वाले सैकड़ों टिप्पर सुरक्षित वन क्षेत्र को व्यवसायिक मार्ग के रूप में उपयोग कर रहे हैं, जो नियमों के विरुद्ध है।
विज्ञापन
व्यावसायिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित वन क्षेत्र का उपयोग गंभीर मामला है और इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। इस संबंध में ओबरा वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी से जानकारी ली गई तो उन्होंने शिकायत पर संज्ञान लेकर जांच कराने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सुरक्षित वन क्षेत्र का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी। निर्भय चौधरी ने खनन क्षेत्र में अवैध सिंडिकेट के सक्रिय होने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि अधिक लाभ कमाने के लिए नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। लीज किसी दूसरे के नाम से होता है और खनन क्षेत्र में हावी सिंडिकेट सारे सिस्टम को मैनेज करके मानक के विपरीत खदानों का संचालन करते है। उन्होंने बताया कि पूर्व में खनन हादसे के बाद 37 खदानों को मानकों के उल्लंघन के कारण बंद कर डेंजर जोन घोषित किया गया था और सुधारात्मक कार्य के निर्देश दिए गए थे, लेकिन वर्तमान में फिर बड़े पैमाने पर खनन जारी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई खदानों में वर्ष 2019 के बाद से आवश्यक भूगर्भीय एनओसी नहीं ली गई है। साथ ही बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के मजदूरों से काम कराया जा रहा है और अली स्टोन में भूगर्भ से पानी की धारा निकलने की भी जानकारी मिली है, जो संभावित खतरे का संकेत है। निर्भय चौधरी का कहना है कि उन्होंने खनन विभाग और डीजीएमएस को कई बार शिकायत दी, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका मानना है कि जब तक मामला खनन निदेशालय और मुख्यमंत्री स्तर तक नहीं पहुंचेगा, तब तक ठोस कार्रवाई की संभावना कम है। फिलहाल, मामले को लेकर खान अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
