Sonbhadra News: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट प्रांगण में किया प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन.
गुरुवार को जनपद की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट प्रांगण में प्रदर्शन किया। सभी सरकारी एवं विभागीय बैठकों में सहभागिता के लिए उचित यात्रा भत्ता (टी.ए./डी.ए.) प्रदान करने की भी मांग की गई है। आंगनबाड़ी संघों के साथ उनकी समस्याओं के समाधान और योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए नियमित सरकारी बैठकें सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
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5:39 PM, Jan 29, 2026
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मांगे पुरी न होने पर लखनऊ में कलम बंद हड़ताल करने की चेतवानी।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
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गुरुवार को जनपद की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट प्रांगण में प्रदर्शन किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित एक मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपा। यह प्रदर्शन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और मानदेय में वृद्धि की लंबित मांगों को लेकर किया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की मांगें कई दशकों से लंबित हैं। भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा उन्हें अब तक न तो सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया गया है और न ही उनके मानदेय में कोई सम्मानजनक वृद्धि की गई है। इसी क्रम में, 18 जनवरी 2026 को लखनऊ में प्रदेश के समस्त संगठनों के प्रांतीय अध्यक्षों ने एक संयुक्त मोर्चा बनाने का निर्णय लिया था। संयुक्त मोर्चे ने सरकार द्वारा की जा रही वादाखिलाफी के विरोध में आज जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजने का निर्णय लिया था। धरना प्रदर्शन के दौरान सीधी चेतावनी दी गईं कि यदि 7 मार्च 2026 तक मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि, पोषण ट्रैकर ऐप पर ऑनलाइन कार्य हेतु 5G मोबाइल और रिचार्ज डेटा के लिए अतिरिक्त धनराशि का भुगतान सहित अन्य मांगें पूरी नहीं की गईं, तो कार्यकर्ता आंदोलन तेज करेंगे। आगे कहा कि यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो पोषण ट्रैकर और समस्त ऑनलाइन कार्य बंद कर दिए जाएंगे। प्रदेश की समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 8 मार्च 2026 को लखनऊ में कलम बंद हड़ताल करने को मजबूर होंगी। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और सहायिकाएं विगत कई दशकों से शिक्षा, टीकाकरण, मातृ-शिशु देखभाल सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की अनेकों योजनाओं का सफल क्रियान्वयन करती आ रही हैं। इसके बावजूद, उन्हें आज भी पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी का दर्जा, वैधानिक सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी मांगों से संबंधित ज्ञापन सरकार को कई बार दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी क्रम में, आगामी आंदोलन की पूर्व सूचना प्रशासन को पहले ही दी जा चुकी है, फिर भी सरकार की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा ने भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष अपनी मुख्य मांगें फिर से प्रस्तुत की हैं। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्रदान करते हुए वेतनमान, भविष्य निधि, पेंशन, ग्रेच्युटी, महंगाई भत्ता और सवेतन मेडिकल अवकाश सहित सभी वैधानिक लाभ दिए जाने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश में सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने और कोरोना काल से अब तक सेवानिवृत्त हुई सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पेंशन एवं ग्रेच्युटी का लाभ देने की मांग की गई है। आंगनबाड़ी से मुख्य सेविका और सहायिका से कार्यकर्ता पद पर पदोन्नति के लिए योग्यता एवं आयु-सीमा की बाध्यता समाप्त करने समेत अन्य मांगे रखी।



