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Sonbhadra News: रुद्रा माइनिंग में अवैध खनन को लेकर 'बिफरा' निषाद समाज, सेकड़ों की संख्या साइड पर पहुंचकर अवैध खनन बंद करने की चेतवानी.

जुगैल थाना क्षेत्र स्थित सोन नदी में अवैध बालू खनन को लेकर निषाद समाज में आक्रोश बढ़ा। रोहित कुमार बिंद ने आरोप लगाया कि नदी की धारा रोककर बड़े पैमाने पर खनन हो रहा है। इससे जलीय जीवों की मौत और मछुआरों की आजीविका प्रभावित हो रही है। समाज के लोगों ने विरोध कर खनन कार्य अस्थायी रूप से बंद कराया। कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई।

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1:20 PM, Apr 26, 2026

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Sonbhadra News: रुद्रा माइनिंग में अवैध खनन को लेकर 'बिफरा' निषाद समाज, सेकड़ों की संख्या साइड पर पहुंचकर अवैध खनन बंद करने की चेतवानी.
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अवैध खनन को लेकर निषाद समाज ने प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाया, कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी।

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Story By: प्रमोद कुमार, जुगैल।

सोनभद्र।

जनपद के सोन नदी में अवैध बालू खनन को लेकर निषाद समाज में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। सम्बंधित अधिकारी अपने ए.सी. कमरे से शिकायत के बावजूद निकलते नहीं और खनन अधिकारी के साठगाठ से बड़े पैमाने पर कई सौ बीघेहे पर अवैध खनन को बदस्तूर अंजाम दिया जा रहा। बड़ी-बड़ी मशीनों और नावों पर मोटर लगाकर लिफ्टर से नदी को छलनी किया जा रहा है, जिससे जीवनदायनी नदी पर बुरा प्रभाव पड़ा है और मछुआ समाज के दिन चर्या और रोजगार प्रभावित हो रहे है और राज्य सरकार को करोड़ो रूपये राजस्व का सीधा नुकसान हो रहा। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं। अब निषाद समाज ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

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निषाद पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष रोहित कुमार बिंद ने आरोप लगाया है कि नदी की धारा को बाधित कर बड़े पैमाने पर अवैध खनन और लोडिंग का कार्य किया जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण बल्कि मछुआ समुदाय की आजीविका पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। शनिवार को समाज के लोगों द्वारा बालू साइड पर धरना दिए जाने की सूचना मिलने पर वे स्वयं मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। रोहित बिंद ने बताया कि सोन नदी, जो बिहार तक जीवनदायिनी मानी जाती है, आज अवैध खनन की वजह से संकट में है। नदी को बांधकर और पुलिया बनाकर जलधारा को पूरी तरह रोक दिया गया है। इससे जलीय जीव-जंतु प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मौके पर कई बड़ी मछलियां मृत अवस्था में मिलीं, जिनका वजन दो से पांच किलो तक था, वहीं सैकड़ों छोटी मछलियां भी मरी पाई गईं।

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उन्होंने बताया कि निषाद समाज का मुख्य व्यवसाय मछली पकड़ना, नदी में सब्जी की खेती करना और नाव के जरिए उसे बाजार तक पहुंचाना है। लेकिन नदी को बाधित किए जाने से उनका पूरा जीवन प्रभावित हो गया है। समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर अस्थायी रूप से खनन कार्य बंद भी कराया। रोहित बिंद ने “भगवा साइड” का जिक्र करते हुए कहा कि यह पट्टा “रुद्रा माइनिंग” के नाम से आवंटित है, लेकिन निर्धारित सीमा लगभग 50 बीघा के बजाय 200 से 250 बीघा क्षेत्र में अवैध खनन किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि खनन के दौरान बड़े पैमाने पर मशीनों और नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो एनजीटी के नियमों का उल्लंघन है। साथ ही यह भी कहा कि विरोध करने वाले स्थानीय लोगों और पत्रकारों को लाठी-डंडों और हथियारों के दम पर डराया-धमकाया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दो दिनों के भीतर अवैध खनन बंद नहीं हुआ तो निषाद समाज बड़ा आंदोलन करेगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि सोमवार को जिलाधिकारी, खनन अधिकारी और एसडीएम को लिखित शिकायत देकर मामले से अवगत कराया जाएगा। साथ ही योगी आदित्यनाथ से मिलकर भी इस मुद्दे को उठाने की बात कही।

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वहीं निषाद पार्टी के जिला उपाध्यक्ष प्रदीप कुमार साहनी ने भी खनन कार्य पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नदी में पुलिया बनाकर जलधारा को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया गया है, जिससे नावों का आवागमन बंद हो गया है। निषाद समाज के खेतों तक पहुंचने का रास्ता भी बाधित हो गया है और उनका पारंपरिक व्यवसाय ठप पड़ गया है। प्रदीप साहनी ने कहा कि पहले खनन सीमित दायरे में होता था, लेकिन अब पूरी नदी को ब्लॉक कर दिया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निषाद समुदाय के ठेकेदारों को साइड नहीं दी जा रही, जबकि बाहुबलियों के साइड निर्बाध रूप से चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि रुद्रा साइड की ओर से दो दिन में पुलिया हटाने का आश्वासन दिया गया है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो समाज के लोग एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करेंगे। निषाद नेताओं ने यह भी चिंता जताई कि लगातार खनन के कारण नदी में पानी कम हो गया है, जिससे भविष्य में नौका विहार जैसी योजनाएं भी प्रभावित होंगी। उन्होंने कहा कि सोन नदी में पहले कछुए और कई दुर्लभ मछलियां पाई जाती थीं, लेकिन अब वे लगभग विलुप्त हो चुकी हैं। समाज के लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर अवैध खनन पर रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।


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