Sonbhadra News: अवैध खनन का बड़ा आरोप, भूजल दोहन से 50 गांवों में पेयजल संकट!.
ओबरा क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी में खनन पट्टे पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता निर्भय चौधरी ने अवैध खनन, अत्यधिक विस्फोटन और भूजल दोहन की शिकायत की है। आरोप है कि तय सीमा से कई गुना अधिक खनन कर राजस्व हानि पहुंचाई जा रही है। भूजल स्तर गिरने से करीब 50 गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है। मामले में उच्चस्तरीय जांच और अवैध खनन पर रोक की मांग की गई है।
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6:20 PM, May 4, 2026
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मामले में उच्चस्तरीय जांच और अवैध खनन पर रोक की मांग की गई है।
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Story By: आर. एन पाण्डेय, डाला।
सोनभद्र।
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जनपद के ओबरा तहसील अंतर्गत बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र में संचालित मंगला प्रसाद डोलो स्टोन खनन पट्टे पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्राम कोटा निवासी निर्भय चौधरी ने आईजीआरएस पोर्टल और पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र भेजकर अवैध खनन, अत्यधिक विस्फोटन और भूजल के अनियंत्रित दोहन की शिकायत दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता के अनुसार बिल्ली मारकुंडी में स्वीकृत खनन पट्टा वर्ष 2025 से 2035 तक के लिए वैध है, लेकिन इसका संचालन नियमों के विपरीत किया जा रहा है। आरोप है कि खनन क्षेत्र की गहराई 200 से 300 फीट तक पहुंच चुकी है, जो सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है और आसपास के लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। इतना ही नहीं, बिना आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र के भूगर्भ जल का बड़े पैमाने पर दोहन किया जा रहा है, जो उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम 2019 का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि खनन की निर्धारित सीमा 165 घनमीटर प्रतिदिन है, जबकि वास्तविकता में 2 से 3 हजार घनमीटर तक खनन कर परिवहन किया जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच रही है, बल्कि सरकार को भी भारी राजस्व हानि हो रही है। क्षेत्र में अत्यधिक विस्फोटक सामग्री के उपयोग और भारी मशीनों के संचालन से ध्वनि और वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायतकर्ता निर्भय ने बताया कि जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद की 31 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट में भी बिना अनुमति भूजल दोहन की पुष्टि की गई थी। इसके बावजूद अब तक संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस पर खान विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायत में खान निरीक्षक पर लापरवाही बरतने और खनन माफियाओं से मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार लगातार हो रहे खनन और भूजल दोहन के कारण क्षेत्र का जलस्तर तेजी से गिरा है। इसका सीधा असर आसपास के करीब 50 गांवों पर पड़ा है, जहां पेयजल संकट गहराता जा रहा है। कई गांवों में हैंडपंप सूख चुके हैं और लोगों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। शिकायतकर्ता निर्भय सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाकर क्षेत्र में भूजल संरक्षण के ठोस उपाय किए जाएं, ताकि बढ़ते जल संकट से राहत मिल सके।



