Sonbhadra News: बिल्ली-मारकुंडी में खनन का खेल! अनुमति से ज्यादा खनन व 300 फीट गहराई तक खुदाई का आरोप, रिपोर्ट पर भी सवाल.
बिल्ली-मारकुंडी में मंगला प्रसाद, राम आसरे और रामजी वैश्य के डोलो स्टोन खनन पट्टे पर गंभीर सवाल उठे हैं। शिकायतकर्ता ने 300 फीट तक खनन, भूगर्भ जल परिषद की एनओसी और खान निरीक्षक अतुल दुबे की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। डीएम से उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर अनियमितता मिलने पर खनन बंद कराने की मांग की गई है।
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3:51 PM, Nov 3, 2026
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बिल्ली-मारकुंडी डोलो स्टोन खनन प्रकरण में शिकायतकर्ता ने प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की।
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Story By: आर.एन. पाण्डेय, डाला।
सोनभद्र।
जनपद में खनन रिपोर्ट को लेकर एक बार फिर उंगली उठी है, सरकारी नियमों की किताब में सब कुछ ठीक है या जमीन पर भी? ये शिकायत पत्र पर निस्तारण से स्पष्ट नहीं हो पा रहा। दरअसल ओबरा तहसील क्षेत्र के बिल्ली-मारकुंडी में मंगला प्रसाद, राम आसरे और रामजी वैश्य के नाम स्वीकृत डोलो स्टोन खनन पट्टे को लेकर उठे सवालों ने खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 60 हजार घनमीटर सालाना खनन की अनुमति के बीच खदान की गहराई 200 से 300 फीट तक पहुंच गई है। सवाल यह है कि आखिर खनन की वास्तविक गहराई और निकाली जा रही खनिज मात्रा की निगरानी कौन कर रहा है? दस्तावेजों के मुताबिक, आराजी संख्या 7410क, 7409, 7402क, 7403क, 7404 और 7405ख पर कुल 2.01 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 19 अप्रैल 2025 से 18 अप्रैल 2035 तक के लिए खनन पट्टा स्वीकृत है। शिकायतकर्ता का दावा है कि प्रतिदिन 10 से 12 पोकलेन मशीनों और हजारों टिपरों के जरिए दो से तीन हजार घनमीटर तक खनन एवं परिवहन किया जा रहा है। यदि यह दावा सही है तो सालाना स्वीकृत मात्रा और वास्तविक खनन के बीच अंतर की जांच बेहद जरूरी है।
एनओसी का सवाल, लेकिन कार्रवाई कहां?
शिकायतकर्ता ने जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद की अनापत्ति के बिना खनन संचालन का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 को भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद की ओर से प्रतिकूल आख्या भी भेजी गई थी। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का सवाल उठाया गया है। आखिर विभागीय रिपोर्टों का उद्देश्य समस्या का समाधान है या फाइलों को एक मेज से दूसरी मेज तक पहुंचाकर मामला ठंडे बस्ते में डालना?
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खान निरीक्षक की रिपोर्ट पर भी सवाल!
मामले में खान निरीक्षक अतुल दुबे की भूमिका भी शिकायत के घेरे में है। शिकायतकर्ता के अनुसार, 7 अप्रैल 2026 को जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि खान निरीक्षक ने शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति में 17 अप्रैल को रिपोर्ट लगाकर प्रकरण का निस्तारण करा दिया। रिपोर्ट में स्वीकृत पट्टा क्षेत्र में खनन एवं परिवहन होने की बात दर्ज की गई। शिकायतकर्ता का सवाल है कि जब शिकायत अनुमति, भूगर्भ जल और खनन की गहराई को लेकर थी तो जांच में इन बिंदुओं का समुचित परीक्षण क्यों नहीं किया गया?
अब डीएम की जांच पर टिकी निगाहें-:
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से अपनी मौजूदगी में उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित करने और अनियमितता मिलने पर खनन बंद कराने की मांग की है। मामला केवल खदान की गहराई का नहीं, बल्कि भूगर्भ जल और आसपास के गांवों के भविष्य का भी है। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। खान निरीक्षक, खनन विभाग और पट्टाधारकों का पक्ष भी सामने आना चाहिए। अब देखना यह है कि प्रशासन खदान की वास्तविक गहराई और खनन की मात्रा की जांच कराता है या फिर यह मामला भी कागजी रिपोर्टों के बीच उलझकर रह जाता है।


