Sonbhadra News: न्यूनतम मानदेय, स्थायीकरण सहित कल्याणकारी मांगों पर जल्द निर्णय की अपील को लेकर रसोइयों ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन.
परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा है। माध्यमिक भारतीय रसोईया वेलफेयर एसोसिएशन उ०प्र० ने वर्ष 2004 से लंबित न्यूनतम मानदेय के अंतर बकाया, स्थायीकरण और रसोइयों के कल्याण से जुड़ी मांगों के शीघ्र निस्तारण की मांग की है।
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2:25 PM, Feb 18, 2026
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मानदेय कम होने से जीविकोपार्जन में हो रही कठनाईया - कार्यरत रसोइये।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
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परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा है। माध्यमिक भारतीय रसोईया वेलफेयर एसोसिएशन उ०प्र० ने वर्ष 2004 से लंबित न्यूनतम मानदेय के अंतर बकाया, स्थायीकरण और रसोइयों के कल्याण से जुड़ी मांगों के शीघ्र निस्तारण की मांग की है। एसोसिएशन ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत रसोइये प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत बहुत कम मानदेय पर कार्य कर रहे हैं, जिससे उनका जीविकोपार्जन कठिन हो रहा है। संगठन का कहना है कि इतने कम मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल है। ज्ञापन में प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिनमें रसोइयों से 11 माह के बजाय पूरे 12 माह कार्य लिए जाने और तदनुसार मानदेय देने की बात शामिल है। इसके अतिरिक्त, रसोइयों का नवीनीकरण स्वतः करने, प्रस्तावित प्रतिबंधों को समाप्त करने, मातृत्व अवकाश, मेडिकल सुविधा और 14 आकस्मिक अवकाश प्रदान करने की भी मांग की गई है। मृतक रसोइयों के स्थान पर उनके परिवार के सदस्य को नियुक्ति तथा न्याय पंचायत स्तर पर स्थानांतरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है। वही माध्यमिक भारती रसोईया वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के संस्थापक संरक्षक तईयब अंसारी ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि 2026-27 के बजट में रसोइयों के लिए न्यूनतम मानदेय की घोषणा की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र निर्णय नहीं लेती है और भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानदेय प्रदान नहीं करती है, तो संगठन देशव्यापी जनांदोलन और हड़ताल करने को बाध्य होगा। अंसारी ने यह भी उल्लेख किया कि आशा, आंगनबाड़ी, बेसिक और शिक्षामित्रों के मानदेय बढ़ाने की चर्चाएं सामने आई हैं, लेकिन रसोइयों के मानदेय वृद्धि पर कोई बात नहीं हुई। संगठन ने शासन द्वारा समय-समय पर जारी आदेशों और कैशलेस सुविधा के प्रयासों के लिए सरकार का आभार भी व्यक्त किया।



