Sonbhadra News: प्रताड़ना के दर्दनाक अंत पर अदालत का फैसला, कविता के पति और देवर को 8-8 साल की सजा.
सोनभद्र में करीब चार वर्ष पुराने कविता आत्महत्या मामले में अदालत ने पति बसंत गोड़ और देवर अमित गोड़ को 8-8 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी/सीएडब्ल्यू बिपिन कुमार तृतीय की अदालत ने दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना नहीं देने पर तीन-तीन माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी, जबकि जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित होगी।
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7:07 PM, Oct 17, 2026
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कविता आत्महत्या मामले में अदालत के फैसले के बाद न्याय की जीत, दोषी पति और देवर को आठ-आठ वर्ष की कैद।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ओबरा।
सोनभद्र।
करीब चार वर्ष पूर्व कविता की आत्महत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी/सीएडब्ल्यू, सोनभद्र की अदालत ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश बिपिन कुमार तृतीय ने मामले में दोषसिद्ध पाए जाने पर कविता के पति बसंत गोड़ और उसके देवर अमित गोड़ को आठ-आठ वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर प्रत्येक को तीन-तीन माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं, जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश दिया गया है।
प्रताड़ना से तंग आकर कविता ने की थी आत्महत्या-:
अभियोजन पक्ष के अनुसार, ओबरा थाना क्षेत्र के अरंगी गांव निवासी लीलावती पत्नी राम सनिही ने 12 सितंबर 2022 को ओबरा थाने में तहरीर देकर अपनी बेटी कविता की आत्महत्या के मामले में कार्रवाई की मांग की थी। तहरीर में बताया गया था कि उन्होंने करीब दो वर्ष पहले अपनी 21 वर्षीय बेटी कविता की शादी ओबरा थाना क्षेत्र के खैरटिया निवासी भगवान दास के पुत्र बसंत गोड़ के साथ की थी। आरोप था कि ससुराल जाने के बाद से ही कविता का पति बसंत गोड़ और उसका देवर अमित गोड़ उसे प्रताड़ित करने लगे थे। वे मायके वालों का भी सम्मान नहीं करते थे। लीलावती के मुताबिक, इसी प्रताड़ना से परेशान होकर कविता ने एक रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने पुलिस को बताया था कि सूचना मिलने पर जब वह मौके पर पहुंचीं तो बेटी का शव सड़क पर रखा हुआ था। उन्हें विश्वास था कि पति और देवर से परेशान होकर कविता ने यह कदम उठाया। उन्होंने मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
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पुलिस ने विवेचना के बाद दाखिल की थी चार्जशीट-:
लीलावती की तहरीर के आधार पर ओबरा पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। विवेचना के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर विवेचक ने न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई।
आठ गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर फैसला-:
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनीं। आठ गवाहों के बयान और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पति बसंत गोड़ और देवर अमित गोड़ को दोषसिद्ध पाया। इसके बाद दोनों को आठ-आठ वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई। अदालत ने दोनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में उन्हें तीन-तीन माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। साथ ही जेल में पहले से बिताई गई अवधि को उनकी सजा में समाहित करने का आदेश दिया गया है। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी अधिवक्ता सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने पैरवी की।


