Sonbhadra News: भाकपा ने 100वां स्थापना दिवस मनाया, विस्थापित किसान और आदिवासी परिवारों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने शुक्रवार को सोनभद्र जनपद के नगवा विकास खंड में अपना 100वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं, आदिवासी, किसानों और मजदूरों ने एक विशाल जुलूस निकाला और जनसभा की।
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5:16 PM, Dec 26, 2025
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वैनी दूबेपुर मोड़ से शुरू हुआ यह जुलूस लगभग तीन किलोमीटर लंबा था।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने शुक्रवार को सोनभद्र जनपद के नगवा विकास खंड में अपना 100वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं, आदिवासी, किसानों और मजदूरों ने एक विशाल जुलूस निकाला और जनसभा की। वैनी दूबेपुर मोड़ से शुरू हुआ यह जुलूस लगभग तीन किलोमीटर लंबा था। इसमें सरकार विरोधी नारे लगाए गए। जुलूस नगवा विकासखंड कार्यालय परिसर के सामने पहुंचकर जनसभा में परिवर्तित हो गया। कार्यक्रम के दौरान नगवा बांध से विस्थापित किसान और आदिवासी परिवारों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। भाकपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने 'विकसित भारत विधेयक' के तहत मनरेगा का नाम बदलकर "जी राम जी" किए जाने का भी कड़ा विरोध किया।
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जनसभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन के महासचिव कामरेड फूलचंद यादव ने कहा कि मनरेगा गरीबों और मजदूरों की जीवनरेखा है। उन्होंने मनरेगा के स्वरूप से छेड़छाड़ को गरीब विरोधी कदम बताया। यादव ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और रोजगार की गारंटी की मांग की। पूर्व विधायक एवं किसान सभा के महासचिव कामरेड राजेंद्र यादव ने किसान, मजदूर और आदिवासी वर्ग से संगठित होकर अपने हक और अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। महिला फेडरेशन की नेत्री कामरेड रमा उदल ने महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस अवसर पर भाकपा उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल सदस्य कामरेड शशिकांत कुशवाहा और राज्य कार्यकारिणी सदस्य एवं जिला सचिव कामरेड आर.के. शर्मा ने भी सभा को संबोधित किया।
किसान सभा और एटक के जिला अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद, जिला सह-सचिव बसावन गुप्ता सहित सैकड़ों कार्यकर्ता और पदाधिकारी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व जिला मंत्री कामरेड राम रक्षा ने की। इसका संचालन पूर्व प्रधान चंदन प्रसाद और देव कुमार विश्वकर्मा ने संयुक्त रूप से किया। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि आदिवासी, किसान और मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर नगवां बीडीओ को एक पत्रक भी सौंपा गया।



