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मुख्य खबरें/न्यूज़/sonbhadra news d s villagers opened a front to protest against the mining lease reached sdm office and demanded action

Sonbhadra News: डी.एस. माइनिंग पट्टे के विरोध में ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, एसडीएम कार्यालय पहुंचकर की कार्रवाई की मांग.

ओबरा क्षेत्र में संचालित मे0 डी.एस. माइनिंग पट्टे के विरोध में ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेता सेत राम केसरी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीण एसडीएम कार्यालय पहुंचे तथा खदान बंद कराने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान की ब्लास्टिंग से घरों में दरारें पड़ रही हैं, पत्थर उड़कर घरों तक पहुंच रहे हैं और धूल-गर्दे से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।

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6:54 PM, Jun 6, 2026

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Sonbhadra News: डी.एस. माइनिंग पट्टे के विरोध में ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, एसडीएम कार्यालय पहुंचकर की कार्रवाई की मांग.
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डी.एस. माइनिंग पट्टे के विरोध में एसडीएम कार्यालय पहुंचे ग्रामीण और महिलाएं, खदान बंद कराने की मांग को लेकर किया प्रदर्शन।

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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरो सोनभद्र।

सोनभद्र।

ओबरा क्षेत्र में संचालित मे0 डी.एस. माइनिंग पट्टे के विरोध में ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीणों और महिलाओं का एक बड़ा समूह कांग्रेस नेता एवं प्रदेश उपाध्यक्ष (ओबीसी विभाग) सेत राम केसरी के नेतृत्व में शनिवार को तहसील दिवस पर एसडीएम कार्यालय पहुंचा और खदान संचालन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के समीप संचालित खदान में होने वाली नियमित ब्लास्टिंग से उनके घरों और परिवारों पर खतरा मंडरा रहा है।

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प्रदर्शन में शामिल गुंजा देवी ने बताया कि खदान उनके घर के बेहद करीब संचालित हो रही है। ब्लास्टिंग के कारण धूल और गर्दे का धुआं फैल रहा है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में जिलाधिकारी को भी ज्ञापन सौंपा गया था, जिसके बाद जांच टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन जांच के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें डराया-धमकाया जाता है। उनका कहना है कि देर रात पुलिस पहुंचकर उनसे पूछताछ करती है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।

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गीता देवी ने बताया कि खदान से होने वाली ब्लास्टिंग के दौरान पत्थर उड़कर गांव तक पहुंच जाते हैं। कई बार पत्थर घरों और आंगनों में गिरे हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। उन्होंने कहा कि गांव में छोटे-छोटे बच्चे रहते हैं और कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने मांग की कि आबादी क्षेत्र के निकट संचालित खदान को तत्काल बंद कराया जाए।

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कांग्रेस नेता सेत राम केसरी ने ग्रामीणों का समर्थन करते हुए कहा कि महिलाओं ने उन्हें सूचना दी थी कि गांव की आबादी से महज 80 से 100 मीटर की दूरी पर खदान संचालित हो रही है। उनका आरोप है कि ब्लास्टिंग के दौरान बड़े-बड़े पत्थर घरों तक पहुंच रहे हैं और लोगों की जान-माल को खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि खदान संचालकों द्वारा विरोध करने वाले ग्रामीणों को धमकाने की शिकायत भी मिली है। सेत राम केसरी ने बताया कि इससे पहले भी 3 जून को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच की मांग की गई थी।

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उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद भी ग्रामीणों को राहत नहीं मिली और उल्टा उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि रात में खदान का संचालन नहीं हो रहा है तो देर रात पुलिस ग्रामीणों से पूछताछ करने क्यों पहुंच रही है। कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि खदान आवंटन में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सामान्यतः खदान और आबादी क्षेत्र के बीच पर्याप्त दूरी होनी चाहिए, लेकिन यहां खदान गांव के बेहद नजदीक संचालित की जा रही है।

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इससे ग्रामीणों के जीवन और संपत्ति पर खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, खदान संचालन के मानकों की समीक्षा करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। सवाल तो यह उठ रहा है कि क्या सिर्फ राजस्व बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन नियमों को ताक पर रखकर खनन नीतियों की धज्जियां उड़ा रहा है!


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