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मुख्य खबरें/न्यूज़/sonbhadra news demonstration of left parties and labor unions at the collectorate regarding restoration of mnrega release of leaders and many other demands

Sonbhadra News: मनरेगा बहाली, नेताओं की रिहाई समेत कई मांगें को लेकर वाम दलों व मजदूर यूनियनों का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन.

मंगलवार को भाकपा, माकपा और माले सहित संयुक्त वाम दलों तथा उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन के कार्यकर्ताओं ने वाराणसी में जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने मनरेगा योजना को बचाने और माले नेताओं की रिहाई सहित विभिन्न मांगों को लेकर वाराणसी-शक्तिनगर मुख्यमार्ग से जुलूस निकाला और कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दिया।

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7:46 PM, Jan 6, 2026

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Sonbhadra News: मनरेगा बहाली, नेताओं की रिहाई समेत कई मांगें को लेकर वाम दलों व मजदूर यूनियनों का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन.
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मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजना को उसके पुराने स्वरूप में बहाल करने की मांग।

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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।

मंगलवार को भाकपा, माकपा और माले सहित संयुक्त वाम दलों तथा उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन के कार्यकर्ताओं ने वाराणसी में जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने मनरेगा योजना को बचाने और माले नेताओं की रिहाई सहित विभिन्न मांगों को लेकर वाराणसी-शक्तिनगर मुख्यमार्ग से जुलूस निकाला और कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दिया। धरने को संबोधित करते हुए कम्युनिस्ट पार्टी के वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट (मनरेगा) एक ऐतिहासिक योजना थी, जिसे तत्कालीन यूपीए सरकार ने वामपंथी पार्टियों की पहल पर ग्रामीण खेत मजदूरों के हित में पारित किया था। इस योजना से करोड़ों ग्रामीण मजदूरों को काम की संवैधानिक गारंटी मिली थी। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा भाजपा सरकार ने मनरेगा को 'विकसित भारत - रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)' (VB-GRAM G) बिल से बदल दिया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा एक्ट में 90%बजट केंद्र सरकार और 10%प्रांतीय सरकारें देती थीं, लेकिन नए VB-GRAM G एक्ट में केंद्र सरकार को 60%और प्रांतीय सरकारों को 40%बजट देना होगा। वक्ताओं ने तर्क दिया कि प्रांतीय सरकारें पहले से ही कर्ज में डूबी हैं, ऐसे में वे 40%धन की व्यवस्था नहीं कर पाएंगी। इसके अलावा, नए एक्ट में 60%काम कृषि क्षेत्र में देने की बात कही गई है, जबकि कृषि में पर्याप्त काम उपलब्ध नहीं है। परिणामस्वरूप, 'VB-GRAM G' एक्ट धन के अभाव में प्रभावी नहीं हो पाएगा और सरकार को इसे बंद करने का बहाना मिल जाएगा। इससे ग्रामीण खेत मजदूरों की आजीविका छिन जाएगी, और भाजपा सरकार मजदूरों को गुलाम बनाने की अपनी कथित 'नापाक साजिश' में सफल हो जाएगी। प्रदर्शनकारियों ने 'विकसित भारत - रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) एक्ट' को जनहित में रद्द करने की मांग की। उन्होंने महात्मा गांधी के नाम पर चल रही मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजना को उसके पुराने स्वरूप में बहाल करने पर जोर दिया। खेत एवं ग्रामीण मजदूरों के लिए वर्ष में 200 दिन काम और 600 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम गारंटीशुदा मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग की गई। इसके अतिरिक्त, 55 वर्ष की आयु पूरी कर चुके सभी खेत मजदूरों को 10,000 रुपये मासिक पेंशन देने की व्यवस्था करने की भी मांग उठाई गई। कार्यकर्ताओं ने खेत मजदूरों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने खेत और ग्रामीण मजदूरों एवं आदिवासियों के प्राकृतिक संसाधनों जैसे जल, जंगल और जमीन को तत्काल वापस करने की भी अपील की। आवास के लिए सभी खेत मजदूरों को 15 डिसमिल जमीन और पक्के आवास के लिए 5 लाख रुपये उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल थी। नेताओं ने मिर्जापुर जिले में कथित तौर पर असंवैधानिक तरीके से गिरफ्तार किए गए भाकपा (माले) - उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव कामरेड सुधाकर यादव और स्टैंडिंग कमेटी की सदस्य कामरेड जीरा भारती व अन्य लोगों को बिना शर्त रिहा करने की मांग पर जोर दिया। उन्होंने दोषी पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की भी मांग की। अन्य मांगों में बिजली के निजीकरण और स्मार्ट मीटरों पर रोक लगाना तथा सभी ग्रामीण मजदूरों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना शामिल था। प्रदर्शन के दौरान, राष्ट्रीय मुद्दों पर महामहिम राष्ट्रपति और स्थानीय मुद्दों पर मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया।


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