मुख्य खबरें/न्यूज़/sonbhadra news devotees became emotional after hearing the marriage incident of shiva parvati the pandal echoed with the slogan of har har mahadev

Sonbhadra News: शिव-पार्वती विवाह प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंजा पंडाल.

मेड़र माता मंदिर परिसर में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ के अंतर्गत बुधवार को कथा व्यास पूज्य श्री दिलीप कृष्ण भारद्वाज महाराज ने भगवान शिव एवं माता पार्वती के मंगल विवाह का सजीव वर्णन किया। कथा के दौरान पूरा पंडाल 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष से गूंज उठा।

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8:25 PM, Jul 22, 2026

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Sonbhadra News: शिव-पार्वती विवाह प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंजा पंडाल.
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मेड़र माता मंदिर परिसर में श्रीराम कथा के दौरान भगवान शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का वर्णन करते कथा व्यास पूज्य श्री दिलीप कृष्ण भारद्वाज महाराज।

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Story By: चंदन कुमार, चोपन।

चोपन स्थित मेड़र माता मंदिर परिसर में सप्तदिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार को कथा व्यास पूज्य श्री दिलीप कृष्ण भारद्वाज महाराज ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का वर्णन किया। इस दौरान पंडाल 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठा। कथा व्यास ने बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। महर्षि नारद के मार्गदर्शन में की गई तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने भगवान शिव की बारात का भी वर्णन किया, जिसमें देवता, ऋषि, गंधर्व और शिवगण शामिल थे। महाराज श्री ने माता सती और भगवान शिव के प्रथम वैवाहिक प्रसंग का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भगवान शिव ने भगवान श्रीराम को परमब्रह्म मानकर प्रणाम किया था, लेकिन माता सती के मन में संशय उत्पन्न हो गया। शिवजी के मना करने के बावजूद माता सती ने माता सीता का रूप धारण कर भगवान राम की परीक्षा लेने का प्रयास किया। भगवान शिव ने इसे अनुचित माना और मन ही मन माता सती का त्याग कर दिया, किंतु उन्होंने कभी कठोर वचन नहीं कहे। कथा व्यास ने कहा कि भगवान शिव का यह चरित्र प्रत्येक गृहस्थ के लिए प्रेरणादायी है, जो सम्मान, धैर्य, त्याग और मर्यादा का संदेश देता है। उन्होंने आगे बताया कि पिता दक्ष के यज्ञ में अपमानित होने के बाद माता सती ने योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए थे। बाद में उन्होंने हिमालय राज के यहां माता पार्वती के रूप में जन्म लिया और कठोर तपस्या के पश्चात पुनः भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। शिव-पार्वती विवाह की दिव्य कथा का श्रवण कर श्रद्धालुओं ने भक्ति का अनुभव किया। कथा के दौरान कई बार पूरा पंडाल 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने कथा व्यास के आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात करते हुए धर्म, संस्कृति और सनातन परंपराओं के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। इस अवसर पर चोपन नगर सहित जनपद सोनभद्र के अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, धर्मप्रेमी श्रद्धालु एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए भक्त बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन समिति कार्यक्रम स्थल पर आयोजन समिति के धर्माचार्य पहाड़ी बाबा शिव कुमार निषाद, नागेश्वर प्रसाद गौड़ एवं वरिष्ठजन सुनील सिंह, राजा मिश्रा, श्यामा चरण गिरी, सन्तोष साहनी, राजकुमार यादव, संदीप चौरसिया सहित अन्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। श्रीराम कथा महोत्सव के माध्यम से क्षेत्र में धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण निरंतर सुदृढ़ हो रहा है।


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