Sonbhadra News: सलखन फॉसिल्स पार्क में इको पर्यटन सत्र शुरू, कैमूर अभयारण्य और सलखन फॉसिल्स पार्क में पर्यटन विकास पर जोर.
मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों में फैले कैमूर वन्यजीव अभयारण्य के सलखन फासिल्स पार्क में आज इको पर्यटन सत्र 2025-26 का शुभारंभ हो गया है। इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध सलखन फॉसिल्स पार्क में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
sonbhadra
8:28 PM, Nov 1, 2025
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फॉसिल्स पार्क में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों में फैले कैमूर वन्यजीव अभयारण्य के सलखन फॉसिल्स पार्क में आज इको पर्यटन सत्र 2025-26 का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध सलखन फॉसिल्स पार्क में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर सदर विधायक भूपेश चौबे ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता और पार्क के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया।
भूपेश चौबे ने बताया कि सोनभद्र स्थित यह फासिल्स पार्क जनपद के लिए गौरव का विषय है। इसे यूनेस्को की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे यह पार्क जल्द ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि पार्क आने वाले पर्यटकों के लिए रेस्ट रूम, शौचालय, पानी और बैठने के लिए बेंच जैसी मूलभूत सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध कराई जाएं। इसके साथ ही, वाराणसी और मिर्जापुर जैसे प्रमुख जनपदों में होर्डिंग लगाकर पार्क का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अन्य क्षेत्रों से भी पर्यटक यहां आ सकें।
इस दौरान जिलाधिकारी बी.एन. सिंह ने सलखन फॉसिल्स पार्क को जनपद की सबसे महत्वपूर्ण पहचान बताया। उन्होंने कहा कि विंध्य पर्वतमाला की कंदराओं में वन्य जीवन और मानव जीवन की उत्पत्ति से संबंधित भित्ति चित्र भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं। सिंह ने आश्वासन दिया कि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक धनराशि जिला प्रशासन सीएसआर और अन्य मदों से उपलब्ध कराएगा।
उन्होंने वन विभाग से पार्क का बेहतर ढंग से सौंदर्यीकरण कराने का आग्रह किया, जिससे यह जनपद की एक बड़ी विरासत और पहचान बन सके। उन्होंने फॉसिल्स पार्क के आगे स्थित तालाब के सौंदर्यीकरण और पार्क के आसपास कैंटीन जैसी सुविधाओं के लिए व्यापक योजना बनाने का भी सुझाव दिया। पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने कहा कि सलखन फॉसिल्स पार्क विश्व धरोहर के रूप में सोनभद्र में स्थित है। इसके व्यापक प्रचार-प्रसार से पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
इस दौरान विधायक सदर भुपेश चौबे, जिलाधिकारी बी.एन. सिंह, अपर जिलाधिकारी(वि./रा.) वागीश कुमार शुक्ला, डी.एफ.ओ. कैमूर वन्य जीव बिहार तापिस मिहिर व डी.एफ.ओ. ओबरा ने भी पौध रोपण किये।
पुलिस अधीक्षक सोनभद्र अभिषेक वर्मा ने जीवाश्म का भ्रमण किया और फॉसिल्स पार्क के बारे में संबंधित अधिकारियों से जानकारी हासिल की। एसपी ने बताया सलखन जीवाश्म पार्क अपनी विशिष्टता के लिए जाना जाता है। इसमें 1.4 अरब वर्ष पुराने स्ट्रोमैटोलाइट्स और शैवाल के जीवाश्म मौजूद हैं, जो पृथ्वी पर प्रारंभिक जीवन के सबसे पुराने प्रमाणों में से एक हैं। यह पार्क दुनिया के सबसे बड़े और सबसे अच्छी तरह से संरक्षित जीवाश्म स्थलों में से एक माना जाता है। इसे हाल ही में यूनेस्को की विश्व धरोहर संभावित सूची में भी शामिल किया गया है। जो हमारे लिए गर्व की बात है। इसकी सुरक्षा के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए।
सदर विधायक भूपेश चौबे ने बताया कि उत्तराखंड के उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद, सोनभद्र ही यूपी का एकमात्र जिला है जहां सबसे अधिक वन क्षेत्र है। वन और जल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और ये दोनों सोनभद्र में प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सोनभद्र में एक विशेष पर्यटन केंद्र खोला जा रहा है।
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जिले में पर्यटन के लिए अलग से अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं। अबाड़ी, मछंदर नाथ और शिवदार सहित कई पर्यटन स्थलों का सुंदरीकरण किया जा चुका है, और अन्य स्थानों को विकसित करने की योजना है। विधायक चौबे ने देश के विकास में पर्यटन के बड़े योगदान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कई पर्यटन स्थलों पर वन विभाग की आपत्तियों के कारण सड़कें नहीं बन पातीं, जिससे पर्यटकों को आवागमन में परेशानी होती है। इस समस्या के समाधान के लिए वन विभाग के साथ बैठक कर हल निकाला जाएगा।
जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने इस अवसर पर अभयारण्य और फॉसिल पार्क के महत्व पर प्रकाश डाला। जिलाधिकारी ने बताया कि लगभग 1450 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला कैमूर वन्यजीव अभयारण्य मानसून के चार महीने बाद 1 नवंबर से पर्यटकों के लिए खुल गया है। अब पर्यटक वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में देख सकेंगे। उन्होंने सलखन फॉसिल्स पार्क को विश्व की ऐतिहासिक धरोहर बताया। यह पार्क कैमूर वन रेंज के अंतर्गत आता है और यहां दुनिया के सबसे पुराने जीवाश्म संरक्षित हैं।
इन जीवाश्मों में पृथ्वी और जीवन की उत्पत्ति के रहस्य छिपे हुए हैं। यह पूरे विश्व में एकमात्र ऐसा स्थल है जहां इस प्रकार के जीवाश्म खुले रूप में पाए जाते हैं। सलखन जीवाश्म पार्क अपनी विशिष्टता के लिए जाना जाता है। इसमें 1.4 अरब वर्ष पुराने स्ट्रोमैटोलाइट्स और शैवाल के जीवाश्म मौजूद हैं, जो पृथ्वी पर प्रारंभिक जीवन के सबसे पुराने प्रमाणों में से एक हैं। यह पार्क दुनिया के सबसे बड़े और सबसे अच्छी तरह से संरक्षित जीवाश्म स्थलों में से एक माना जाता है।
इसे हाल ही में यूनेस्को की विश्व धरोहर संभावित सूची में भी शामिल किया गया है। पर्यटन की दृष्टि से इस स्थल को विकसित करने के लिए बुनियादी ढांचा और पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि फॉसिल्स पार्क आने वाले पर्यटकों के लिए रेस्ट रूम, शौचालय, पानी की व्यवस्था और बैठने हेतु बेंच जैसी मूलभूत सुविधाएं सुचारू ढंग से उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने कहा कि वन विभाग पर्यटकों के लिए आकर्षक सुविधाएं विकसित करने का प्रयास कर रहा है और जिला प्रशासन इसमें पूरा सहयोग करेगा। इसके प्रचार-प्रसार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लगभग 25 एकड़ के इस क्षेत्र में सघन वनीकरण और पर्यटन सुविधाओं के विकास का कार्य चल रहा है। प्रभागीय वन अधिकारी इस संबंध में आगे की कार्रवाई करेंगे।
वही कार्यक्रम के दौरान स्कूली छात्र भी शामिल हुई, कैमूर वन्यजीव अभयारण्य के आयोजक द्वारा स्कूली छात्रों के लिए विशेष आयोजन किया गया था। जनरल नॉलेज के सवालों पर बच्चों ने सभी जवाब देकर उपस्थित लोगों का दिल जीत लिया, बच्चों की प्रतिभा के लिए उनको पुरस्कृत किया गया।
तपस मिहिर (डीएफओ कैमूर), भास्कर प्रसाद पाण्डेय (वाइल्ड लाइफ वार्डन चुर्क), श्रद्धा त्रिपाठी (रेंजर रॉबर्ट्सगंज), ज्ञानेश कुमार (रेंजर घोरावल), पवन सचान (रेंजर गुरमा), धर्मराज सिंह (फारेस्टर), शिवम सिंह (फारेस्टर), अवधेश सिंह (फारेस्टर), सदानंद यादव (फारेस्टर), विश्वजीत (फारेस्ट गॉर्ड), ऋषि पाल (फारेस्ट गॉर्ड), अभिषेक सिंह (वाइल्ड लाइफ गॉर्ड) व अन्य वनकर्मी समेत स्कूली छात्र और बड़ी तादाद में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।



