Sonbhadra News: सालों बीतने के बाद भी अपहृत किशोरी को पुलिस नहीं खोज पाई, कोर्ट का मामले में आया आदेश.
पांच साल पहले अपहृत हुई एक युवती को पुलिस अब तक बरामद नहीं कर पाई है। इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रॉबर्ट्सगंज कोतवाल और क्षेत्राधिकारी (सीओ) को तलब किया है। पुलिस अधिकारियों ने अदालत से विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने और युवती को बरामद करने के लिए समय मांगा है।
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5:09 PM, Feb 1, 2026
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आरोप, लापता बेटी के मां पर पूर्व में कई बार हो चुके हैं हमले।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
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पांच साल पहले अपहृत हुई एक युवती को पुलिस अब तक बरामद नहीं कर पाई है। इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रॉबर्ट्सगंज कोतवाल और क्षेत्राधिकारी (सीओ) को तलब किया है। पुलिस अधिकारियों ने अदालत से विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने और युवती को बरामद करने के लिए समय मांगा है। यह घटना 16 फरवरी 2020 की है। भाटौलिया तेंदू निवासी धर्मशीला मौर्य की 19 वर्षीय बेटी सुबह करीब 10 बजे घर से निकली थी, लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटी। इसके बाद रॉबर्ट्सगंज थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अपहृत युवती की मां को बाद में पता चला कि उनकी बेटी का अपहरण वंशराज और वीरेश कुमार यादव उर्फ मोहन यादव ने स्कॉर्पियो में जबरन बैठाकर किया था। उन्होंने पुलिस को सूचना देकर अपहरण का मुकदमा दर्ज कराना चाहा, लेकिन पुलिस ने तत्काल कार्रवाई नहीं की। तीन साल बाद, 6 अगस्त 2023 को आखिरकार अपराध संख्या 474/2023 धारा 366 भादवि के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने युवती को बरामद किए बिना ही तीन महीने के भीतर, 3 अक्टूबर को आरोप पत्र दाखिल कर दिया। दोनों आरोपी गिरफ्तार किए गए थे, जो फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। युवती की मां जब इस मुकदमे की पैरवी करने लगीं, तो उन पर कई बार हमला हुआ। इस संबंध में कोतवाली रॉबर्ट्सगंज में अपराध संख्या 666/2025 के तहत एक और मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन पुलिस की सक्रियता में कमी देखी गई। इससे पहले, न्यायालय CAW अपर सत्र न्यायाधीश ने भी पुलिस अधीक्षक को अपहृत युवती की बरामदगी के लिए टीम गठित करने का आदेश दिया था, लेकिन पुलिस ने इस पर संवेदनशीलता नहीं दिखाई थी। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया है। उच्च न्यायालय ने 24 फरवरी 2026 को अगली सुनवाई तय की है। अधिवक्ता संतोष दुबे ने यह मामला उच्च न्यायालय के समक्ष उठाया था। पुलिस ने तब एसआईटी गठित करने और अपहृत बेटी को बरामद करने का आश्वासन दिया था, जिसके लिए समय मांगा गया था। अधिवक्ता विकास शाक्य ने पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस अमीरी-गरीबी के आधार पर व्यवहार करती है। उन्होंने इम्तियाज हत्याकांड का उदाहरण दिया, जिसमें उस्मान अली को 'विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम 2018' के तहत आठ साल से छह पुलिस कांस्टेबल द्वारा तीन-स्तरीय सुरक्षा दी जा रही है। वहीं, गरीब मौर्य परिवार की अपहृत बेटी की मां, जो इस मामले की वादिनी हैं, उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है, लेकिन पुलिस ने उन्हें आज तक कोई सुरक्षा नहीं दी है। शाक्य ने चेतावनी दी कि यदि अपहृत बेटी की मां के साथ कोई गंभीर घटना होती है, तो सोनभद्र पुलिस सीधे तौर पर जिम्मेदार होगी। अपहृत बेटी की मां की उम्मीदें अब 24 फरवरी को उच्च न्यायालय के अगले आदेश पर टिकी हैं।



