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Sonbhadra News: मनरेगा बचाओ को लेकर कलेक्ट्रेट पर गरजे खेत मजदूर, नई योजना वापस लेने की मांग.

मनरेगा बचाओ अभियान के तहत खेत मजदूर यूनियन और भाकपा कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नई ग्रामीण रोजगार योजना को वापस लेने और मनरेगा को पूर्व स्वरूप में बहाल करने की मांग की। इस दौरान जल, जंगल, जमीन की रक्षा और आदिवासी विश्वविद्यालय की स्थापना का मुद्दा भी उठाया गया। राष्ट्रपति के नाम 15 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया।

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6:56 PM, Jun 23, 2026

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Sonbhadra News: मनरेगा बचाओ को लेकर कलेक्ट्रेट पर गरजे खेत मजदूर, नई योजना वापस लेने की मांग.
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मनरेगा बचाओ अभियान के तहत कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन करते उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन और भाकपा कार्यकर्ता।

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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरो सोनभद्र।

उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को मनरेगा बचाओ अभियान के तहत कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने राजमार्ग से नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला और गांधी उद्यान पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद धरना देकर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा देश की एक ऐतिहासिक योजना है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब और खेत मजदूर परिवारों को रोजगार की गारंटी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा को समाप्त कर "विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण)" योजना लागू करने जा रही है, जिससे ग्रामीण मजदूरों के अधिकार प्रभावित होंगे। वक्ताओं का कहना था कि नई व्यवस्था में राज्यों पर वित्तीय भार बढ़ेगा और रोजगार के अवसर सीमित हो सकते हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मनरेगा के तहत ग्राम सभाओं को मिले अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि नई योजना लागू होने से ग्रामीण मजदूरों को मिलने वाला रोजगार और आजीविका का सुरक्षा कवच कमजोर पड़ सकता है। इस दौरान वक्ताओं ने ग्रामीण मजदूरों के लिए वर्ष में 200 दिन रोजगार और न्यूनतम 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग की। धरना-प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आदिवासी समुदायों के परंपरागत अधिकारों की सुरक्षा की मांग करते हुए सोनभद्र में कैमूर आदिवासी विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग रखी। साथ ही स्थानीय युवाओं को उद्योगों और कारखानों में प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने की भी मांग की गई। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम संबोधित 15 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। ज्ञापन में मनरेगा को पूर्व स्वरूप में बहाल करने, खेत मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, आवास, कृषि भूमि आवंटन तथा ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों की रक्षा जैसी मांगें शामिल थीं। कार्यक्रम के समापन पर कार्यकर्ताओं ने लखनऊ कोचिंग सेंटर हादसे में जान गंवाने वाले किशोरों के प्रति शोक व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन रखा और श्रद्धांजलि अर्पित की। धरने में आर.के. शर्मा, बसावन गुप्ता, अमरनाथ बिंद, रामभजन कुशवाहा, नंदू यादव, रामसूरत खरवार सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और मजदूर उपस्थित रहे।


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