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Sonbhadra News: 6 साल बाद मिला इंसाफ, पत्नी को जिंदा जलाने वाला पति पहुंचा सलाखों के पीछे.

दहेज हत्या के छह वर्ष पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश, सोनभद्र की अदालत ने आरोपी पति मनोज मुसहर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अभियोजन के अनुसार वर्ष 2020 में आरोपी ने दहेज की मांग को लेकर पत्नी सुगवत्ती देवी पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी थी, जिससे इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई थी।

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5:25 PM, Jun 19, 2026

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Sonbhadra News: 6 साल बाद मिला इंसाफ, पत्नी को जिंदा जलाने वाला पति पहुंचा सलाखों के पीछे.
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सोनभद्र जिला एवं सत्र न्यायालय, जहां दहेज हत्या के मामले में आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरो सोनभद्र।

दहेज उत्पीड़न और महिला अपराध के एक चर्चित मामले में करीब छह वर्ष बाद न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया है। दहेज की मांग पूरी न होने पर पत्नी को मिट्टी का तेल छिड़ककर जिंदा जलाने वाले आरोपी पति को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश, सोनभद्र की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी मनोज मुसहर को दोषी करार दिया। न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास के साथ एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर छह माह की अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतनी होगी। अभियोजन के अनुसार रामपुर थाना क्षेत्र निवासी रामनरेश मुसहर ने वर्ष 2020 में अपनी पुत्री सुगवत्ती देवी की दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि शादी के बाद से ही पति मनोज और उसके पिता दहेज की मांग को लेकर सुगवत्ती को प्रताड़ित करते थे। 21 जुलाई 2020 की रात उस पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी गई, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गई। घायल महिला का इलाज जिला अस्पताल और बाद में रॉबर्ट्सगंज के एक निजी अस्पताल में कराया गया, जहां 6 अगस्त 2020 को उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और साक्ष्य मिलने पर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने नौ गवाहों की गवाही, दस्तावेजी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का अवलोकन किया। साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए न्यायालय ने आरोपी पति को दोषी ठहराया और कठोर सजा सुनाई। न्यायालय के इस फैसले को दहेज हत्या जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह निर्णय उन मामलों में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां पीड़ित परिवार वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा करता है।


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