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Sonbhadra News: सिंदुरिया में सौ साल पुरानी रामलीला का मंचन, कलाकार ब्रह्मचर्य का पालन कर निभाते हैं पात्र.

ओबरा तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत सिंदुरिया में सौ वर्षों से अधिक पुरानी रामलीला का मंचन जारी है। कड़ाके की ठंड के बावजूद स्थानीय ग्रामीण कलाकार पूर्ण श्रद्धा, आस्था और अनुशासन के साथ प्रभु श्रीराम की लीलाओं का अभिनय कर रहे हैं।

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9:03 PM, Jan 16, 2026

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Sonbhadra News: सिंदुरिया में सौ साल पुरानी रामलीला का मंचन, कलाकार ब्रह्मचर्य का पालन कर निभाते हैं पात्र.
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प्रसिद्ध रामलीला का आयोजन पांडेय परिवार द्वारा किया जाता है।

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Story By: चंदन कुमार, चोपन।

सोनभद्र।

ओबरा तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत सिंदुरिया में सौ वर्षों से अधिक पुरानी रामलीला का मंचन जारी है। कड़ाके की ठंड के बावजूद स्थानीय ग्रामीण कलाकार पूर्ण श्रद्धा, आस्था और अनुशासन के साथ प्रभु श्रीराम की लीलाओं का अभिनय कर रहे हैं।

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इस रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सभी पात्र ब्राह्मण समाज से होते हैं और वे पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए पाठ और अभिनय करते हैं। अपनी शुद्ध परंपरा, मौलिकता और ग्राम्य संस्कृति से जुड़ाव के कारण यह रामलीला क्षेत्र में विशेष पहचान बनाए हुए है। हाल ही में नारद मोह लीला का मंचन किया गया, जिसमें हास्य, भक्ति और आध्यात्मिक संदेश का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

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दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। रामलीला की शुरुआत मुकुट पूजा से होती है और सीता विवाह तक की लीलाओं का अत्यंत सुंदर और मर्यादित मंचन किया जाता है। रामलीला के समापन अवसर पर सीता विवाह के दिन भव्य भंडारे का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन पांडेय परिवार द्वारा किया जाता है, जिसमें परिवार के सभी सदस्य बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर इस धार्मिक आयोजन का पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।

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पूर्व प्रधान राम नारायण पांडेय ने बताया कि ग्रामीण मानते हैं कि यदि रामलीला का मंचन न हो, तो गांव में कोई अनिष्ट हो सकता है। यह रामलीला ग्रामीणों की अटूट आस्था का प्रतीक है। पिछले वर्ष होली के दिन बिना किसी आंधी-तूफान के रामलीला मंचन के लिए उपयोग किया जाने वाला टिन शेड उखड़ गया था।

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इसमें लगे एंगल भी टेढ़े हो गए और पूरा सेट गिर गया, जिससे ग्रामीण एक बार फिर भयभीत हो गए। इसके बाद पुरोहितों और अन्य पुजारियों द्वारा पूजा-पाठ और मान-मनोवल के बाद कीर्तन का निर्णय लिया गया। यह रामलीला मंचन आठ दिनों तक चलता है,

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जिसमें आज भगवान के जन्म का मंचन किया जाएगा। दूर-दूर से लोग इस रामलीला को देखने आते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। यहां से गुजरने वाले और मान्यताओं से परिचित लोग चबूतरे पर नतमस्तक होकर मन्नतें मांगते हैं, जो पूरी होती हैं।

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सिंदुरिया का पांडेय परिवार इस रामलीला का आयोजन अत्यंत स्वच्छता और समर्पण के साथ करता है। राम नारायण पांडेय स्वयं ब्रह्मा का किरदार निभाते हैं और मूर्तियों के श्रृंगार की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर होती है।

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राम जानकी पाण्डेय ने बताया सभी ग्रामीण आस्था के साथ रामलीला के आयोजन में लगे रहते हैं। आठ दिनों के इस मंचन के दौरान, आसपास के नगर में कोई भी बड़ा कार्य या निमंत्रण होने पर भी शायद ही कोई ग्रामीण रामलीला छोड़कर किसी अन्य कार्यक्रम में शामिल होने जाता है। यह ग्रामीणों की गहरी आस्था और परंपरा के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है।


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