Sonbhadra News: सोनभद्र में रात्रि में अवैध खनन बदस्तूर जारी, सुरक्षा से खिलवाड़ और राजस्व की बड़े पैमाने पर चोरी का मामला आया सामने
बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में रात्रि में अवैध खनन जहां सुरक्षा की दृष्टि से भी घातक है तो वहीं सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व की हानि पहुंच रही है, लेकिन संबंधित विभाग अपनी आंखें मूंदे हुए हैं।
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8:59 AM, Aug 29, 2025
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रात्रि में अवैध खनन जोरों पर।
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Story By: विकास कुमार हलचल, ब्यूरों सोनभद्र।
सोनभद्र।
बिल्ली मारकुण्डी क्षेत्र में खनन माफिया द्वारा अवैध गतिविधियां जारी हैं। रात के समय बड़ी बड़ी मशीनों से धरती का सीना छलनी कर अवैध खनन किया जा रहा है। टिपर वाहन बिना किसी रोक-टोक के रात के अंधेरे में धरल्ले से बोल्डर परिवहन कर दुर्घटना को दावत दे रहे है। जिला प्रशासन इस अवैध गतिविधि से अवगत होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। पर्याप्त मात्रा में रोशनी न होने के बावजूद मेसर्स श्री बालाजी एसोसिएट्स में बोल्डर तोड़ाई का कार्य बदस्तूर जारी है। जबकि प्रयाप्त मात्रा में रोशनी न होने पर किसी भी कार्य के लिए मनाही होती है। रात में खनन कर राजस्व की चोरी का बहुत बड़ा खेल होता है।
खनन क्षेत्र से जुड़े व्यवसायी राजस्व की चोरी में लिप्त हैं। कुछ अधिकारी इस अवैध कार्य में सहयोग कर अपनी और अपने परिवार की संपत्ति को सात पुश्तों तक के लिए जमा करने की कवायद में लगे हुए है। वर्तमान सरकार चुनावी तैयारियों में व्यस्त है। इस बीच प्रशासनिक अधिकारी मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं। सरकार में गठबंधन की सहयोगी पार्टी के मंत्रियों द्वारा अपने पसंदीदा अधिकारियों को चुनिंदा जिलों में नियुक्त किया जा रहा है। ये अधिकारी फिर अपने करीबियों को अवैध खनन की छूट दे रहे हैं। अधिकारियो के करीबी भी वही बनते है जो अवैध खनन की छूट के बदले बड़ा लाभ दे। जनता की समस्या का सरोकार भरने वाले स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
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पद की गरिमा की शपथ लेने के बावजूद आर्थिक लाभ के लिए मौन हैं। पूरा सिस्टम ही करप्त है। जनता को दिखाने के लिए नेता सरकार की कार्यशैली पर उंगली उठाते है वही नेता अवैध खनन में बराबर के हकदार के लिए सिंडिकेट में शामिल हो जाते है। विपक्ष के नेताओं और इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है। बता दे कि ओबरा तहसील के उप जिलाधिकारी कार्यालय के कुछ किलोमीटर ही यह गतिविधियां चल रही हैं। ओबरा तहसील और खनन विभाग के अधिकारी मौके पर जांच करने नहीं जाते। उल्टा शिकायतकर्ता की पहचान खनन माफिया को बता दी जाती है। नियमों के विपरीत खदानों में पेड़ नदारद दिख रहे न तो पर्यावरण का ध्यान रखा जा रहा है और न ही स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य का।
उल्टा ग्राउंड लेवल के लिए जमा पानी को मोटर पंप से निकाला जा रहा जिससे वाटर लेवल पर संकट आ गया है। जो प्रदुषण से होने वाली बीमारी से ग्रस्त लोगों पर तो यहां के अधिकारियों का ध्यान ही नहीं जाता। अन्य विभागों में शिकायत करने पर कम से कम दिखावटी कार्रवाई तो होती है, लेकिन खनन विभाग में कोई सुनवाई नहीं होती। अधिकारी सिर्फ कागजी कार्रवाई का दावा करते हैं। वे कहते हैं कि अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई होगी और दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा। लेकिन न तो कोई टीम मौके पर जाती है और न ही अवैध खनन रुका है। ऐसा प्रतीत होता है कि पूरा सिस्टम खनन माफिया के नियंत्रण में है और उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है।



